Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सामने आए चर्चित चरस बरामदगी मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। प्रदेश के High Court ने इस मामले में स्थानीय पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के आदेश जारी किए हैं। अदालत का मानना है कि मामले के रिकॉर्ड में कई ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं, जिनसे जांच की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है। ऐसे में सच्चाई सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है।यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की एकल पीठ ने जामयांग तेसरिंग और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिका में भुंतर थाना में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी।
पुलिस के अनुसार यह मामला 22 फरवरी 2026 का है। बताया गया कि भुंतर के सिउंड क्षेत्र में शाम लगभग 6:50 बजे नियमित नाकाबंदी के दौरान मणिकर्ण की ओर से आ रही एक कार को जांच के लिए रोका गया। वाहन में कायडेन रेगजिन, जामयांग तेसरिंग और तेनजिन क्याब सवार थे।पुलिस का दावा है कि तलाशी के दौरान वाहन से 28 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके अलावा एक सूटकेस से 500-500 रुपये के नोटों में कुल चार लाख रुपये नकद भी मिले। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने अदालत में पुलिस के पूरे घटनाक्रम को गलत और मनगढ़ंत बताया। उनका कहना था कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मामला वास्तविक नहीं बल्कि झूठा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उनसे अवैध रूप से धन की मांग की थी और जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया।याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि जामयांग तेसरिंग अमेरिका से भारत लौटे थे और अपने साथियों के साथ हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में एक नया स्टार्टअप शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहे थे। इसी उद्देश्य से वे मनाली और मणिकर्ण क्षेत्र का दौरा करके वापस लौट रहे थे।
याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस ने तीनों लोगों को लगभग सात घंटे तक घटनास्थल पर ही रोके रखा। इस दौरान उन्हें न तो भोजन दिया गया और न ही पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया गया। उनके अनुसार पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि इसी दौरान हुई धक्का-मुक्की में जामयांग तेसरिंग सड़क पर गिर गए और उसी समय वहां से गुजर रहे एक टेंपो ट्रैवलर की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद पूरी घटना को रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन किया। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में कई ऐसे तथ्य हैं जिनका संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।कोर्ट ने पूछा कि यदि आरोपियों को शाम 6:50 बजे रोका गया था तो उन्हें रात लगभग 1:30 बजे तक मौके पर ही क्यों रखा गया। इतने लंबे समय तक हिरासत जैसी स्थिति में रखने का स्पष्ट कारण पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था।इसके अलावा पुलिस ने अदालत को बताया कि कार्रवाई के दौरान उसका ई-साक्ष्य एप काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण पूरी तलाशी और बरामदगी की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी। अदालत ने इस स्पष्टीकरण को भी गंभीरता से लिया।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि जामयांग तेसरिंग सड़क पर कैसे गिरे और उन्हें वाहन की टक्कर किन परिस्थितियों में लगी। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम का संतोषजनक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।अदालत का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर रूप से घायल होता है तो उस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत और पारदर्शी रिकॉर्ड होना चाहिए। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया।
हालांकि अदालत ने इस स्तर पर एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पुलिस ने वाहन से प्रतिबंधित पदार्थ बरामद होने का दावा किया है और शुरुआती चरण में तथ्यों की गहराई से जांच कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस समय मिनी ट्रायल करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सभी तथ्यों और रिकॉर्ड में सामने आई कमियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय पुलिस की जांच पर पूरी तरह भरोसा करना उचित नहीं होगा। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच CBI Investigation के माध्यम से कराई जानी चाहिए।अदालत ने निर्देश दिया कि चरस बरामदगी, नकदी की बरामदगी, पुलिस की कार्रवाई, याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप, घायल होने की घटना तथा पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच सीबीआई करेगी। जांच एजेंसी उपलब्ध सभी दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज कर वास्तविक तथ्यों का पता लगाएगी।
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यह मामला अब केवल चरस बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी बड़ा सवाल बन गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी रहेंगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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