Post by : Khushi Joshi
शिमला में वर्ल्ड बैंक द्वारा वित्त पोषित पेयजल और सीवरेज परियोजना को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि शिमला को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बनाई गई योजनाओं के लिए वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा लाभार्थी संस्थाओं तक नहीं पहुंच रहा है। जयराम के अनुसार विश्व बैंक से इस परियोजना के लिए 587 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए थे, लेकिन निष्पादन कर रही कंपनी को सिर्फ 250 करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा बजट सरकार के पास पहुंच चुका है, तो शेष राशि आखिर गई कहां और किस कारण रोक दी गई है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार फंड रोककर परियोजना की गति धीमी कर रही है, जिससे राजधानी शिमला में प्रस्तावित 24×7 जल आपूर्ति और नए सीवरेज नेटवर्क के निर्माण पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना की मंजूरी पूर्व सरकार ने दी थी और इसके तीन बड़े चरणों पर काम होना था—सतलुज नदी से शिमला तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया, शहर में नई पाइपलाइन बिछाने और प्रेशराइज्ड सप्लाई सिस्टम तैयार करने का काम तथा सीवरेज नैटवर्क को आधुनिक बनाना। उनका कहना है कि सभी चरणों के लिए कुल 1825 करोड़ रुपए की लागत निर्धारित की गई थी, लेकिन फंड रिलीज में देरी और अस्पष्टता के चलते अब परियोजना खतरे में पड़ गई है।
उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करते हुए कहा कि जिस पैसे की एवज में शहर की जल आपूर्ति को आधुनिक बनाने की योजना बनी, वह पैसा सरकारी खातों में कैसे अटका रह गया। जयराम का कहना है कि परियोजना के रुकने से न केवल शिमला की जल समस्या बनी रहेगी, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं का भी समाधान अधर में अटक जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि वर्ल्ड बैंक द्वारा भेजी गई राशि का सही उपयोग नहीं हुआ, तो इससे राज्य की विश्वसनीयता और विकास परियोजनाओं पर फंडिंग को लेकर केंद्रीय एजेंसियों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने शिमला दौरे के दौरान पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ भी सुनी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा महिला कबड्डी टीम और ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम की सराहना प्रेरणादायक है और देश के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाती है। जयराम ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता अपनाए और शिमला परियोजना से जुड़े वित्तीय सवालों के जवाब तुरंत जनता के सामने रखे, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और कार्य शीघ्रता से पूरा हो सके।
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