Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने प्रदेश सरकार के कुछ राजनीतिक निर्णयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य को समझदारी और बचत की नीति से चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक संकट का मुख्य कारण गलत योजनाएं, फिजूलखर्ची और भारी प्रशासनिक ढांचा है। उन्होंने ब्राह्मण समुदाय के लिए बनाए गए बोर्ड और उसमें बड़ी संख्या में सदस्यों की नियुक्ति को आर्थिक संकट के समय अनावश्यक फैसला बताया।
90 के दशक में बचत के लिए उठाए गए कड़े कदम
शांता कुमार ने कहा कि जब उन्हें प्रदेश की सरकार चलाने की जिम्मेदारी मिली थी, तब उन्होंने फिजूलखर्ची रोकने के लिए कई बड़े फैसले लिए थे। उन्होंने अपने कार्यालय से ही बचत अभियान शुरू किया और प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित किया। उन्होंने बताया कि उस समय मंत्रिमंडल छोटा रखा गया और अनावश्यक पदों का गठन नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की आय बढ़ाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए थे। उन्होंने केंद्र सरकार से पनबिजली परियोजनाओं में रॉयल्टी का सिद्धांत लागू करवाया, जिससे प्रदेश को लाखों रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी। इसके साथ ही अधिकारियों के टेलीफोन कनेक्शन कम कर खर्च में कमी लाई गई।
सरकारी गाड़ियों के उपयोग पर रोक से बड़ी बचत
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि सबसे ज्यादा फिजूलखर्ची सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग से होती थी। इसे रोकने के लिए एक बचत समिति बनाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता मंत्री महेंद्रनाथ सोफ्त कर रहे थे। उस समय आदेश दिया गया था कि सरकारी वाहन शुक्रवार शाम तक अपने केंद्र पर लौट आएंगे और शनिवार, रविवार तथा सोमवार को बिना अनुमति सड़क पर नहीं चलेंगे।
उन्होंने बताया कि इस फैसले से उस समय करीब 50 करोड़ रुपये की बचत हुई थी, जिसमें से लगभग 30 करोड़ रुपये केवल सरकारी गाड़ियों के खर्च से बचाए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि आज इसी तरह के फैसले लागू किए जाएं तो प्रदेश को 500 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है।
शांता कुमार ने कहा कि आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकार को सख्त बचत नीतियां अपनानी होंगी और अनावश्यक खर्चों को रोकना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को विकास और जनहित योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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