Post by : Khushi Joshi
हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए इस वर्ष मौसम की अनिश्चितता, मिट्टी की बिगड़ती सेहत और प्राकृतिक आपदाओं ने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। लगातार बदलते मौसम, आवश्यक चिलिंग आवर्स की कमी और समय–समय पर होने वाली भारी बारिश या ओलावृष्टि से बागवानों की पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ऐसे हालातों में किसानों को नई दिशा देने के उद्देश्य से अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड (AAFL) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने अपने रोहरू, सेंज और रामपुर स्थित प्रोक्योरमेंट सेंटर्स में सॉइल टेस्टिंग महीने की शुरुआत की है, जो किसानों के लिए मिट्टी की गुणवत्ता समझने और फसल सुधारने का एक बड़ा मौका साबित हो सकता है।
यह कार्यक्रम खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और मिट्टी जनित बीमारियों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है। प्रदेश की स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी भी समय–समय पर किसानों को सलाह देती रही है कि नियमित अंतराल पर मिट्टी की जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अडानी एग्री फ्रेश की यह पहल किसानों के लिए वैज्ञानिक, किफायती और समयोचित समाधान लेकर आई है।
बीते सेब सीजन में, अगस्त से अक्टूबर के बीच, कई निजी संस्थानों ने खरीद घटा दी थी या रोक दी थी, लेकिन अडानी एग्री फ्रेश लगातार किसानों के साथ खड़ा रहा। कंपनी द्वारा लगभग 22 हजार टन सेब की ऐतिहासिक खरीद की गई, जिसने हजारों किसानों को राहत दी और उनकी आय को स्थिरता प्रदान की। विशेष बात यह रही कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रोक्योरमेंट सेंटर्स को 24 घंटे खुला रखा गया, ताकि कोई भी किसान किसी भी समय अपना माल बेच सके। यहां तक कि आधी रात को पहुंचे किसानों से भी सेब की खरीदी की गई, जो इस बात का प्रमाण है कि अडानी एग्री फ्रेश किसानों के हितों को प्राथमिकता देता है।

अब, खरीदी सीजन के तुरंत बाद कंपनी ने मिट्टी की सेहत पर जोर देते हुए किसानों की दीर्घकालिक लाभ के लिए यह सॉइल टेस्टिंग ड्राइव शुरू की है। इस कार्यक्रम के तहत AAFL से जुड़े किसानों को एक मिट्टी सैंपल की जांच मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अन्य किसानों को भी यह सुविधा बाजार से कम कीमत पर मिलेगी। इस जांच में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया जाएगा, जिसके माध्यम से मिट्टी में उपस्थित या अनुपस्थित पोषक तत्वों का विस्तृत विश्लेषण होगा। मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश, फॉस्फोरस जैसे आवश्यक तत्वों की उपलब्धता और pH लेवल जैसी महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को प्राप्त होगी, जिससे वे भूमि सुधार और उर्वरक प्रबंधन की बेहतर योजना बना सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश के अधिकतर इलाकों में मिट्टी की गुणवत्ता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से गिरी है, जिसका सीधा प्रभाव सेब उत्पादन पर देखा जा रहा है। ऐसे में यह पहल आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता और फसल की गुणवत्ता को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अनुमान है कि इस कार्यक्रम का लाभ 5000 से अधिक किसानों तक पहुंचेगा जो अपने बागानों में मिट्टी सुधार के उपाय अपनाकर बेहतर उत्पादन कर सकेंगे।
स्थानीय किसानों का भी कहना है कि मौसम पर नियंत्रण संभव नहीं है, लेकिन मिट्टी की सेहत को बेहतर करने का प्रयास उनके हाथ में है। मिट्टी की सही जांच से यह पता लगेगा कि फसल को किस तरह की पोषण पूर्ति की आवश्यकता है और कौन से सुधारात्मक कदम समय रहते उठाए जा सकते हैं। यही समझ भविष्य में फसल को प्राकृतिक चुनौतियों के मुकाबले अधिक मजबूत बना सकती है।
कुल मिलाकर, अडानी एग्री फ्रेश की यह पहल हिमाचल के सेब बागवानों के लिए सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बदलते मौसम और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच यह कार्यक्रम किसानों को नया आत्मविश्वास देने का काम कर रहा है। राज्य के कृषि क्षेत्र में ऐसी पहलें न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी बल्कि हिमाचल के सेब उद्योग को दीर्घकालिक मजबूती भी प्रदान करेंगी।
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