हमीरपुर में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए उपायुक्त ने दिए सख्त निर्देश
हमीरपुर में सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए उपायुक्त ने दिए सख्त निर्देश

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 13, 2026 5:22 p.m. 126

हमीरपुर जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को रोकने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने की, जिसमें लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जिले की प्रमुख सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों, ग्रामीण संपर्क मार्गों तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि जहां भी सड़क दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है, वहां सड़कों की स्पष्ट मार्किंग, दिशा संकेतक, चेतावनी बोर्ड तथा अन्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं प्राथमिकता के आधार पर स्थापित की जाएं ताकि वाहन चालकों और राहगीरों को समय रहते आवश्यक जानकारी मिल सके।

दुर्घटना संभावित स्थानों की होगी विशेष निगरानी

बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ने वाले कई ग्रामीण संपर्क मार्गों, चौक-चौराहों और क्रॉसिंग क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार अधिकांश हादसे तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण सामने आ रहे हैं।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां आवश्यकतानुसार स्पीड ब्रेकर, बैरिकेडिंग, सड़क मार्किंग तथा चेतावनी संकेत लगाए जाएं। साथ ही नियमित निरीक्षण कर यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लगाए गए संकेतक स्पष्ट रूप से दिखाई दें और उनकी समय-समय पर मरम्मत भी होती रहे। उनका कहना था कि सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है।

यातायात नियमों का पालन कराने पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए जाएं। ओवरस्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना तथा सीट बेल्ट का प्रयोग न करना जैसी लापरवाहियों पर सख्ती बरती जाएगी।अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लोगों को जागरूक करने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों तथा सार्वजनिक स्थानों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेष जागरूकता अभियान भी आयोजित किए जाएं, ताकि लोग स्वयं भी नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलैस इलाज की सुविधा

बैठक में सड़क हादसों के पीड़ितों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने बताया कि किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ा मानव धर्म है। ऐसे लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को सरकार की गुड सेमेरिटन योजना के तहत सम्मानित भी किया जाता है।उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को निर्धारित अस्पतालों में अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। यदि घायल व्यक्ति को दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार सात दिनों तक कैशलैस उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए ताकि जरूरतमंद इसका लाभ उठा सकें।

जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान की जरूरत

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही सफल हो सकती है। लोगों को यातायात नियमों के पालन, सुरक्षित वाहन संचालन और दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।अधिकारियों ने सुझाव दिया कि स्थानीय निकायों, शिक्षण संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिससे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

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विभिन्न विभागों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

बैठक में पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, प्रशासनिक अधिकारियों तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। सभी अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि बेहतर सड़क अवसंरचना, प्रभावी निगरानी, समय पर चेतावनी संकेत और आम लोगों की जागरूकता से यातायात नियम का पालन बढ़ेगा तथा सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी।बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में कैशलैस इलाज की सुविधा, सुरक्षित सड़क व्यवस्था और यातायात नियमों के प्रभावी पालन को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

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