Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की एयर विंग के दस दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में कैडेटों ने अपनी तकनीकी प्रतिभा, अनुशासन और नवाचार का ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उपस्थित सभी अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अतिथियों को प्रभावित कर दिया। शिविर के दौरान आयोजित एयरोमॉडलिंग प्रदर्शन में कैडेटों ने स्वयं तैयार किए गए विभिन्न विमान मॉडलों, ड्रोन और रेडियो नियंत्रित विमानों का सफल प्रदर्शन कर अपनी तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि युवाओं में विज्ञान, विमानन और आधुनिक तकनीक के प्रति रुचि विकसित करने का भी प्रभावी मंच साबित हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेटों के साथ अधिकारी, प्रशिक्षक और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन विंग कमांडर कुणाल शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। शिविर के दौरान जूनियर डिवीजन के कैडेटों ने विभिन्न प्रकार के स्टैटिक एयरोमॉडल्स की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई। इन मॉडलों में विमान निर्माण की बारीकियों, संतुलन, डिजाइन और तकनीकी अवधारणाओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया।इस प्रदर्शनी में डीएवी मंडी, डीएवी मौहल, केंद्रीय विद्यालय रामशिला, डीएवी लक्कड़ बाजार शिमला, डीएवी मनाली, सीआईएस कुल्लू तथा एलएमएस कलैहली के कैडेटों ने भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। सभी मॉडलों को कैडेटों ने स्वयं तैयार किया था, जिसने दर्शकों को काफी प्रभावित किया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा स्वयं निर्मित ड्रोन और रेडियो नियंत्रित विमानों का लाइव हवाई प्रदर्शन रहा। कैडेटों ने अपने तैयार किए गए ड्रोन और आरसी विमान को सफलतापूर्वक उड़ाकर उनकी उड़ान क्षमता, नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया।जब ड्रोन और रेडियो नियंत्रित विमान हवा में विभिन्न दिशाओं में उड़ान भरते हुए करतब दिखा रहे थे, तब पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस प्रदर्शन ने यह साबित किया कि युवा आधुनिक तकनीक को सीखने और उसे व्यवहारिक रूप देने में पूरी तरह सक्षम हैं।
गवर्नमेंट कॉलेज कुल्लू और आईआईटी मंडी के वरिष्ठ डिवीजन के कैडेटों ने कंट्रोल लाइन एयरक्राफ्ट मॉडल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उड़ान के दौरान उन्होंने विमान नियंत्रण, संतुलन और तकनीकी संचालन का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित अधिकारियों ने काफी सराहा।विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में तकनीकी सोच विकसित करने के साथ-साथ समस्या समाधान क्षमता और आत्मविश्वास को भी मजबूत करती हैं।
शिविर के दौरान आयोजित एयरोमॉडलिंग गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। जब विद्यार्थी स्वयं मॉडल तैयार करते हैं और उन्हें सफलतापूर्वक संचालित करते हैं तो उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और नवाचार की भावना विकसित होती है।इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों को विमानन तकनीक, यांत्रिकी, संतुलन, वायुगतिकी और नियंत्रण प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त हुई। इससे उनके भीतर भविष्य में रक्षा सेवाओं, विमानन और तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने की प्रेरणा भी विकसित हुई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षक रेशमा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में कैडेटों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया। इसके अलावा फ्लाइंग ऑफिसर निश्छल शर्मा, फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन, पीआई स्टाफ, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी तथा केयरटेकर अधिकारियों ने भी पूरे शिविर के दौरान कैडेटों का निरंतर मार्गदर्शन किया।अधिकारियों ने कैडेटों को तकनीकी विषयों के साथ अनुशासन, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता के महत्व से भी अवगत कराया।
शिविर के कमांडेंट विंग कमांडर कुणाल शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर युवाओं के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, तकनीकी ज्ञान, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का विकास होता है।उन्होंने कहा कि एनसीसी का उद्देश्य केवल सैन्य प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है, जो हर परिस्थिति में देश और समाज की सेवा के लिए तैयार रहें।
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एयरक्राफ्ट मॉडल, ड्रोन और एयरोमॉडलिंग गतिविधियों ने कैडेटों को आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ने का कार्य किया। इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे आयोजन युवाओं को नई तकनीकों के प्रति आकर्षित करेंगे और देश में विज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार की संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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