रिटायर्ड टीचर शीला देवी की प्राकृतिक खेती से आलू उत्पादन में बड़ी सफलता
रिटायर्ड टीचर शीला देवी की प्राकृतिक खेती से आलू उत्पादन में बड़ी सफलता

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 26, 2026 5:29 p.m. 1977

प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। किसान रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों को छोड़कर प्राकृतिक तरीकों से खेती अपनाकर न केवल सुरक्षित खाद्यान्न उगा रहे हैं, बल्कि अपनी आय में भी अच्छी वृद्धि कर रहे हैं।

भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राह्मणा की रिटायर्ड शिक्षिका शीला देवी ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। शीला देवी और उनका परिवार पहले पारंपरिक रूप से गेहूं, मक्की और धान की खेती करता था, लेकिन रासायनिक खाद के अधिक खर्च और कम पैदावार के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।

स्थिति को देखते हुए शीला देवी ने प्राकृतिक विधि से आलू की खेती करने का निर्णय लिया। पहली बार उन्होंने केवल 5 किलोग्राम आलू बीज का प्रयोग किया और इसमें केवल गोबर की खाद का उपयोग किया। इस प्रयास से उन्हें लगभग साढ़े चार क्विंटल आलू की पैदावार प्राप्त हुई।

इस सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने बड़े स्तर पर आलू की खेती शुरू की और कुछ श्रमिकों को भी कार्य पर रखा। पिछले सीजन में लगभग एक बीघा भूमि से ही उन्होंने कई क्विंटल आलू की उपज हासिल की। खास बात यह रही कि पूरी खेती बिना किसी रासायनिक खाद, कीटनाशक और सिंचाई सुविधा के की गई।

शीला देवी का कहना है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि इससे खेती की लागत भी कम होती है और किसान को अधिक लाभ मिलता है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन की सराहना की।

उनकी सफलता को देखकर अब गांव के अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। पहले जहां इस क्षेत्र में आलू की खेती नहीं होती थी, अब वहां किसान इस पद्धति को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

प्रदेश सरकार का प्रोत्साहन

प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्की, गेहूं और हल्दी के लिए सरकार ने अलग-अलग उच्च समर्थन मूल्य निर्धारित किए हैं। प्राकृतिक मक्की 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं 60 रुपये प्रति किलोग्राम और कच्ची हल्दी 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जा रही है।

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