दिल्ली AI समिट में हुए हुड़दंग पर कमलेश कुमारी का कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला
दिल्ली AI समिट में हुए हुड़दंग पर कमलेश कुमारी का कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 27, 2026 10:50 a.m. 171

दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय AI समिट के दौरान हुई कथित हुड़दंग की घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री एवं भोरंज की पूर्व विधायक कमलेश कुमारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को देश और प्रदेश की छवि के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जारी बयान में उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व स्तर पर आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है, तब इस प्रकार की घटनाएं भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हैं।

कमलेश कुमारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आयोजित इस महत्वपूर्ण AI समिट में दुनियाभर के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योगपति और नीति निर्माता एकत्र हुए थे। ऐसे समय में यदि कुछ लोग कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए हुड़दंग करते हैं, तो यह न केवल आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है बल्कि देश की प्रतिष्ठा को भी आघात पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक विषयों पर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं अत्यंत निंदनीय हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शनकारी स्वयं को निर्दोष बताते हैं, तो वे जांच से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति खुद को बेगुनाह मानता है, तो उसे सामने आकर जांच का सामना करना चाहिए। छिपने या बचने का प्रयास यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं गंभीर दोष मौजूद है। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सभी को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

पूर्व विधायक ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार और कांग्रेस नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जब किसी राज्य के लोग किसी अन्य राज्य में जाकर कानून व्यवस्था भंग करते हैं, तो संबंधित राज्य सरकार का दायित्व बनता है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग प्रदान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल पुलिस को जांच में पूर्ण सहयोग करना चाहिए था, किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि खाकी वर्दी का उपयोग अपराधियों को बचाने के लिए ढाल के रूप में किया गया।

कमलेश कुमारी ने यह भी कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान उपद्रवियों का मनोबल बढ़ाने वाले प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को अपने शब्दों और बयानों में संतुलन और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। कानून तोड़ने वालों का परोक्ष या अपरोक्ष समर्थन करना शपथ की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है, न कि उसे चुनौती देने वालों को संरक्षण देना।

उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार होती, तो ऐसे तत्वों के विरुद्ध अब तक सख्त और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की जा चुकी होती। उन्होंने कहा कि भाजपा न तो अराजकता को सहन करती है और न ही अपराधियों को संरक्षण देती है। उनके अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।

कमलेश कुमारी ने कहा कि इस घटना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और विशेषकर हिमाचल प्रदेश की छवि को जो क्षति पहुंची है, उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर कांग्रेस सरकार पर है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, जहां की संस्कृति, मर्यादा और सामाजिक सौहार्द की देशभर में सराहना की जाती है। यदि कुछ लोग इस मर्यादा को भंग करते हैं और सरकार उनके विरुद्ध सख्त कदम नहीं उठाती, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने मांग की कि संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दिल्ली पुलिस की जांच में किसी भी प्रकार की बाधा डालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रदेश सरकार कानून के साथ खड़ी है या कानून तोड़ने वालों के साथ। उन्होंने प्रदेश सरकार से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर उचित निर्णय करेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देवभूमि की मर्यादा को तार-तार करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी और कांग्रेस सरकार को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और वही अंतिम निर्णय करती है।

उन्होंने अंत में कहा कि भारत आज तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। ऐसे में देश की सकारात्मक छवि को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान अनुशासन, संयम और कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेंगी और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भाजपा ने इसे कानून व्यवस्था का गंभीर मामला बताया है, वहीं कांग्रेस की ओर से भी अपने स्तर पर प्रतिक्रिया दी जा सकती है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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