पराशर ऋषि मंदिर में सजा सरनाहुली मेला, उमड़े देवी-देवता और श्रद्धालु
पराशर ऋषि मंदिर में सजा सरनाहुली मेला, उमड़े देवी-देवता और श्रद्धालु

Author : Bhardwaj Mandi. (HP) Mandi. HP

June 15, 2026 12:59 p.m. 119

मंडी जिले के प्रसिद्ध पराशर ऋषि मंदिर में आयोजित होने वाला सरनाहुली मेला एक बार फिर धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक मान्यताओं का केंद्र बन गया है। हर वर्ष आषाढ़ माह की संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाला यह ऐतिहासिक मेला इस बार भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। मेले का आयोजन 16 तारीख तक चलेगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु और क्षेत्र के विभिन्न देवी-देवता भाग ले रहे हैं। इस धार्मिक आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले पराशर ऋषि मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है। समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। सरनाहुली मेले के दौरान यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। मंदिर परिसर में सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है और लोग भगवान के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आसपास की विभिन्न घाटियों से करीब 25 से 40 स्थानीय देवी-देवता अपने पारंपरिक रथों और वाद्ययंत्रों के साथ यहां पहुंचते हैं। ढोल, नगाड़ों और शहनाइयों की गूंज के बीच देवी-देवताओं का आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार सभी देवी-देवता यहां पहुंचकर महर्षि पराशर को नमन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

सरनाहुली मेले के दौरान धार्मिक आयोजन और पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व रहता है। बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार करवाने के लिए इस पवित्र स्थल पर पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि यहां पर किए गए संस्कार और पूजा-अर्चना से बच्चों को सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना भी करते हैं।

यह मेला केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हिमाचल की समृद्ध हिमाचली संस्कृति और लोक परंपराओं को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। मेले में स्थानीय लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश देते हैं। इससे नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।

प्राकृतिक सुंदरता से घिरे पराशर क्षेत्र में इन दिनों विशेष रौनक देखने को मिल रही है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक पराशर झील तथा मंदिर की भव्यता का आनंद लेने के साथ-साथ मेले में शामिल होकर धार्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

सरनाहुली मेला हिमाचल प्रदेश की उन परंपराओं का प्रतीक है, जो आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़कर रखे हुए हैं। आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह अनूठा संगम आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता रहेगा। इस वर्ष भी सरनाहुली मेला धार्मिक उत्साह और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए पूरे क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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