Author : Ashok Kumar Chamba
चंबा/शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय बजट और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लेकर हलचल मची हुई है। प्रदेश कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एडवोकेट सुरजीत शर्मा भरमौरी ने केंद्रीय बजट में हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) से बाहर किए जाने को प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा "आर्थिक अन्याय" और "विश्वासघात" करार दिया है।
सुरजीत भरमौरी ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय हिमाचल के लोगों की उम्मीदों पर चोट है। उन्होंने इसे केवल बजट नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के विकास और आर्थिक सुरक्षा के लिए विनाशकारी दस्तावेज बताया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि वित्त आयोग के इस फैसले से प्रदेश को हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा और वर्ष 2026 से 2031 तक मिलने वाली करीब 50,000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता अब प्रदेश को नहीं मिल पाएगी। इस बड़े आर्थिक नुकसान से प्रदेश के विकास कार्य और आर्थिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा।
उन्होंने भाजपा सांसदों पर भी तीखी टिप्पणी की। सुरजीत भरमौरी ने कहा कि प्रदेश की जनता ने भाजपा को लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल 7 सांसदों का जनादेश दिया था, ताकि वे दिल्ली में हिमाचल की आवाज बनें। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता ने वोट दिया, लेकिन बदले में क्या मिला? न तो हिमाचल की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हुई, न ही सांसदों ने हिमाचल के हितों की रक्षा की। भाजपा सांसद दिल्ली में हिमाचल की पैरवी करने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
सुरजीत भरमौरी ने इस बजट और वित्त आयोग के फैसले को "काला दिवस" बताते हुए कहा कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में हिमाचल प्रदेश कहीं नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिमाचल का स्वाभिमानी अवाम इस अन्याय को न भूल पाएगा और न ही चुप बैठेगा। प्रदेश के हक और अस्तित्व की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज बुलंद की जाएगी और केंद्र सरकार की इस अनदेखी का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि हिमाचल के किसान, मजदूर, बागवान और आम नागरिक इस निर्णय से सीधे प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक चुनौतियों, कृषि लागत, आपदा प्रबंधन और पर्यटन विकास को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। प्रदेश के विकास और आर्थिक सुरक्षा के लिए यह बजट नकारात्मक और हिमाचल-विरोधी है।
सुरजीत भरमौरी ने कहा कि आगामी समय में प्रदेश कांग्रेस और जनप्रतिनिधि सभी मंचों पर हिमाचल के लिए इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि हिमाचल के लिए बंद की गई Revenue Deficit Grant को पुनः बहाल किया जाए, ताकि प्रदेश के विकास और जनता की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस पूरी घटनाक्रम से हिमाचल की सियासत और जनता में केंद्रीय बजट को लेकर भारी असंतोष की स्थिति देखने को मिली है। जनता और विपक्ष का संदेश स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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