Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल का लंझता गांव अब अपनी नई पहचान बना रहा है। यहां पहले जहां खेतों में केवल पारंपरिक फसलें उगाई जाती थीं, वहीं अब बड़ी संख्या में लीची के बाग दिखाई देने लगे हैं। एचपी शिवा परियोजना की मदद से गांव के किसानों ने आधुनिक बागवानी को अपनाया है। कई वर्षों की मेहनत के बाद अब इन पौधों पर फल आने शुरू हो गए हैं, जिससे किसानों में खुशी और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।
54 किसानों ने लगाए 10 हजार से ज्यादा लीची के पौधे
एचपी शिवा परियोजना के तहत लंझता गांव में वर्ष 2019-20 से लीची की खेती की शुरुआत हुई। पहले चरण में 500 पौधे लगाए गए। इसके बाद किसानों की अच्छी भागीदारी और परियोजना की सफलता को देखते हुए अगले दो वर्षों में 9,505 और पौधे लगाए गए। आज गांव के 54 किसान लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 10 हजार से अधिक लीची के पौधों की देखभाल कर रहे हैं। यह क्षेत्र अब एक बड़े लीची क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुका है।
आधुनिक सुविधाओं से किसानों को मिला बड़ा सहारा
फलों की अच्छी पैदावार के लिए केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं होता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए परियोजना के तहत किसानों को सिंचाई और पौधों की देखभाल के लिए बेहतर सुविधाएं भी दी गई हैं। यहां एक लाख लीटर क्षमता का बड़ा पानी का टैंक बनाया गया है। इसके अलावा 20-20 हजार लीटर क्षमता वाले सात अन्य जल भंडारण टैंक भी तैयार किए गए हैं। बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर किसानों को आधुनिक खेती, पौधों की देखभाल और रोगों से बचाव की जानकारी भी दे रहे हैं। इससे किसानों को खेती आसान बनाने में मदद मिली है।
परियोजना से जुड़े किसान प्रकाश चंद ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर करीब 850 लीची के पौधे लगाए हैं। शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं था कि यह खेती भविष्य में अच्छी आय दे सकेगी। लेकिन अब पौधों पर फल आने शुरू हो गए हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ लीची का फल नहीं, बल्कि कई वर्षों की मेहनत और धैर्य का परिणाम है। उन्हें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ेगा और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी।
महिलाओं के लिए भी बनी नई उम्मीद
गांव की किसान लता देवी ने भी अपनी जमीन पर 834 लीची के पौधे लगाए हैं। उनके अनुसार पिछले वर्ष से पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने लगे हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे पौधे बड़े होंगे, उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक लीची की खेती से गांव की महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भर बनने का अच्छा अवसर मिला है। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत हो रही है।
किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष इस लीची क्लस्टर से लगभग 12 से 15 क्विंटल उत्पादन हुआ था। हालांकि इस बार मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण उत्पादन घटकर लगभग 4 से 5 क्विंटल रह गया। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि पौधों की उम्र बढ़ने के साथ उत्पादन भी लगातार बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
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वैज्ञानिक खेती से बढ़ रही सफलता
बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना में हाई डेंसिटी तकनीक से पौधरोपण किया गया है, जिससे कम जमीन पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और आधुनिक खेती की जानकारी दी जा रही है। साथ ही बगीचों की सुरक्षा के लिए मजबूत बाड़बंदी भी की गई है, ताकि जंगली जानवरों और बेसहारा पशुओं से पौधों को नुकसान न पहुंचे। विभाग का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना यह साबित कर रही है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो और किसान आधुनिक तकनीक अपनाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। लंझता गांव में विकसित हो रहे लीची के बाग इस सकारात्मक बदलाव का उदाहरण हैं और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकता है।
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