बद्दी में लघु उद्योग संघ की बैठक, सख्त फायर नियम और अधूरी फोरलेन से उद्योग परेशान
बद्दी में लघु उद्योग संघ की बैठक, सख्त फायर नियम और अधूरी फोरलेन से उद्योग परेशान

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 16, 2026 1:11 p.m. 122

बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर लघु उद्योग संघ की मासिक कार्यकारिणी बैठक मोतिया प्लाजा सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार राणा ने की। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान उद्योगपतियों ने कहा कि वर्तमान समय में बीबीएन क्षेत्र में उद्योग चलाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। कई नियम और कानूनी प्रक्रियाएं इतनी जटिल हैं कि उनका पालन करना छोटे उद्योगों के लिए लगभग असंभव हो गया है।

प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार राणा ने कहा कि 500 और 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में संचालित छोटे कारखानों को फायर सेफ्टी लाइसेंस लेने और उसका नवीनीकरण करवाने में सबसे अधिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि अग्निशमन विभाग की प्रक्रियाएं बेहद जटिल हैं और छोटे उद्योगों के लिए इन्हें पूरा करना आसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों के पास सीमित स्थान होता है, ऐसे में 50 हजार से लेकर एक लाख लीटर तक के जल भंडारण टैंक बनाना संभव नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि 2000 वर्ग मीटर तक के कारखानों के लिए अलग और व्यावहारिक नियम बनाए जाएं।

डॉ. राणा ने स्पष्ट कहा कि बड़ी कंपनियों के पास पर्याप्त धन और जगह होती है, इसलिए वे नए फायर नियमों का पालन कर सकती हैं, लेकिन एमएसएमई क्षेत्र के उद्योग चाहकर भी इन नियमों को पूरी तरह लागू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 1990 से 2005 के बीच स्थापित उद्योगों की क्या गलती है, जिन्हें अब नई व्यवस्था के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह सख्त नियम लागू किए जाते रहे तो बीबीएन क्षेत्र के सैकड़ों उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के उद्योग मंत्री से मिलकर इस विषय पर चर्चा करेगा।

बैठक में बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतपाल जस्सल ने कहा कि यह परियोजना पिछले 11 वर्षों से निर्माणाधीन है, लेकिन पिंजौर से नालागढ़ तक लगभग 35 किलोमीटर का हिस्सा अब तक पूरा नहीं हो सका है।

उन्होंने केंद्र सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में रोजाना 100 किलोमीटर सड़क निर्माण का दावा किया जाता है, तो बीबीएन क्षेत्र की यह महत्वपूर्ण सड़क अब तक अधूरी क्यों है।

उन्होंने बताया कि इस मार्ग की खराब स्थिति के कारण छोटे वाहनों से लेकर ट्रक और टैंपो तक को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्राईसिटी और बीबीएन क्षेत्र के उद्योग इस मार्ग से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

महासचिव अनिल कुमार ने कहा कि नालागढ़ को पंजाब से जोड़ने वाला दभोटा पुल पिछले तीन वर्षों से टूटा पड़ा है। एक छोटे पुल के निर्माण में इतनी देरी होना चिंताजनक है, खासकर जब बरसात का मौसम निकट है।

इसके अतिरिक्त बद्दी-बरोटीवाला मार्ग की हालत भी खराब है। सड़क कई स्थानों पर टूटी हुई है और मार्ग संकरा होने के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि इस सड़क का चौड़ीकरण समय की मांग है।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित हैं और उद्योग ही रोजगार का प्रमुख साधन हैं। यदि उद्योगों पर अत्यधिक दबाव डाला गया और वे बंद होने लगे, तो इसका सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ेगा।

उद्योगपतियों ने कहा कि वे नियमों का पालन करना चाहते हैं और सुरक्षा मानकों के पक्ष में हैं, लेकिन एक या दो घटनाओं के आधार पर पूरे सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्षेत्र को कठोर दंड नहीं दिया जाना चाहिए।

बैठक में डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता हरीश शर्मा, सोनिया ठाकुर, दविंद्र कौर, शिवानी, दीपक कुमार वर्मा, सतपाल जस्सल, अनिल कुमार और शिवा कुमार सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

लघु उद्योग संघ ने स्पष्ट किया कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो उद्योगों के अस्तित्व पर संकट गहराएगा और इसके लिए सरकार को जवाबदेह होना पड़ेगा।

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