श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया गया
श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया गया

Post by : Shivani Kumari

Nov. 5, 2025 11:31 p.m. 140

श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व: देशभर में हर्षोल्लास से मनाया गया

श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व आज, बुधवार, 5 नवंबर 2025 को देशभर में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह पर्व सिख समुदाय के लिए एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण उत्सव है, जो सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी की जयंती को समर्पित है। उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को राय भोई की तलवंडी में हुआ था, जो आज ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है और वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है। इस वर्ष उनकी 556वीं जयंती का उत्सव मनाया जा रहा है, जो न केवल सिखों के लिए, बल्कि समस्त मानवता के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। गुरु नानक देव जी के उपदेश ईमानदारी, समानता, निस्वार्थ सेवा, और एक ईश्वर में विश्वास पर आधारित हैं, जो आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गुरुद्वारों में एकत्रित हुए, जहाँ अखंड पाठ, शब्द-कीर्तन, नगर कीर्तन, और लंगर सेवा जैसे पारंपरिक आयोजन आयोजित किए गए, जो इस पर्व की आध्यात्मिक और सामाजिक गहराई को दर्शाते हैं।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके उपदेश सिख धर्म की नींव रखते हैं। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता मेहता कालू एक पटवारी थे और माता त्रिप्ता ने उन्हें प्रारंभिक शिक्षा दी। बचपन से ही वे आध्यात्मिकता और सामाजिक अन्याय के प्रति जागरूक थे। उन्होंने जाति-प्रथा, धार्मिक कट्टरता, और सामाजिक असमानता के खिलाफ अपनी आवाज उठाई, जो उनके उपदेशों का मूल आधार बना। उनकी प्रसिद्ध यात्राएँ, जिन्हें उदासी कहा जाता है, ने उन्हें भारत, अफगानिस्तान, अरब, और श्रीलंका जैसे देशों में ले जाया, जहाँ उन्होंने लोगों को एकता और भाईचारे का संदेश दिया। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने विभिन्न धर्मों के संतों और विद्वानों के साथ संवाद किया, और अपने अनुभवों को शबद रूप में व्यक्त किया, जो बाद में गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हुआ। यह ग्रंथ आज भी सिख समुदाय का पवित्र मार्गदर्शक है, जो उनके विचारों और शिक्षाओं को जीवित रखता है।

इस वर्ष 556वें प्रकाश पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि यह गुरु नानक देव जी के जीवन और संदेश को पुनर्जनन करने का अवसर प्रदान करता है। देशभर के गुरुद्वारों में दो दिन पहले से ही अखंड पाठ शुरू हो गया था, जो 48 घंटों तक निरंतर चला। यह पाठ गुरु ग्रंथ साहिब की सम्पूर्ण पंक्तियों का गायन और व्याख्या है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है और उनके मन को एकाग्र करता है। इसके बाद नगर कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें भक्त जुलूस के रूप में सज-धजकर गुरुद्वारों से निकले और पवित्र शबद गाते हुए प्रभु का गुणगान किया। इन जुलूसों में पंज प्यारों की अगुवाई में निशान साहिब, जो सिख ध्वज है, लहराया गया, जो समुदाय की एकता और गौरव का प्रतीक है। रंग-बिरंगी पगड़ियाँ, फूलों के हार, और ढोल-नगाड़ों की थाप ने इस उत्सव को और भी जीवंत बना दिया।

देशभर में उत्सव की झलकियाँ

देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया गया, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जहाँ सुबह से ही शबद-कीर्तन और कथा-प्रवचन शुरू हो गए। लंगर सेवा में लाखों लोगों को मुफ्त भोजन परोसा गया, जिसमें अमीर-गरीब, हिंदू-सिख सभी ने एक साथ भोजन किया, जो गुरु नानक देव जी की समानता की शिक्षाओं का सजीव उदाहरण था। पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर सजा हुआ था, जहाँ रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजावट ने माहौल को और पवित्र बना दिया। वहाँ की शानदार आतिशबाजी और भव्य जुलूस ने पर्यटकों को भी आकर्षित किया, जो इस पर्व की भव्यता को देखने के लिए दूर-दूर से आए थे।

हिमाचल प्रदेश में उत्सव ने स्थानीय रंगों के साथ एक अनूठा रूप लिया। पांवटा साहिब के गुरुद्वारा में हिंदू और सिख श्रद्धालु एक साथ आए, जो इस क्षेत्र की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। यहाँ यमुना नदी के किनारे आयोजित कीर्तन और प्रभात फेरी ने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिकता को जोड़ा, जहाँ सुबह की ठंडी हवा और नदी का बहता पानी श्रद्धालुओं के लिए एक अलौकिक अनुभव लेकर आया। इसी तरह, शिमला और धर्मशाला में भी गुरुद्वारों में विशेष सत्संग और सामुदायिक भोज आयोजित किए गए। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह देखते बन रहा था, जहाँ महिलाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर उत्सव को रंगीन बनाया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में, स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। वहाँ के गुरुद्वारे में अखंड पाठ के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिसमें बच्चों ने गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए, जो उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बना। झारखंड के धनबाद में, कोयला खदानों के मजदूरों ने भी उत्सव में हिस्सा लिया और लंगर में सेवा की, जो श्रमिक वर्ग की भागीदारी को दर्शाता है और गुरु नानक की समानता की भावना को मजबूत करता है। दक्षिण भारत में, चेन्नई और हैदराबाद के गुरुद्वारों में तमिल और तेलुगु भाषाओं में कीर्तन हुए, जो क्षेत्रीय भाषाओं के साथ सिख परंपराओं का मेल दिखाता है और भारत की एकता में विविधता को रेखांकित करता है।

सरकारी और सामाजिक पहल

इस पर्व पर देश के उच्च पदस्थ नेताओं ने भी अपनी शुभकामनाएँ दीं, जो इस उत्सव की राष्ट्रीय महत्व को बढ़ाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा के बाली यात्रा उत्सव के साथ-साथ गुरु नानक जयंती पर बधाई दी, जिसे ओडिशा की समुद्री और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना गया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि गुरु नानक के उपदेश सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि गुरु नानक देव जी के उपदेश ईमानदारी और नैतिकता की प्रेरणा देते हैं, जो आज के समाज के लिए प्रासंगिक हैं और हमें सही दिशा में ले जाने में सहायक हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेंशनर्स के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान की शुरुआत की, जो तकनीकी प्रगति और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन को दर्शाता है और सरकार की जन-केंद्रित नीतियों को मजबूती प्रदान करता है।

सरकारी संस्थानों और शैक्षणिक निकायों ने भी इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगोष्ठियाँ आयोजित कीं, जो अंतरधार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देती हैं और समाज में शांति और एकता का संदेश फैलाती हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को ने गुरु नानक देव जी के विश्व शांति और सामाजिक सुधार के योगदान को मान्यता दी है, जो उनके वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करता है और उनके संदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाता है। विदेशों में, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में सिख समुदाय ने परेड और सेमिनार आयोजित किए, जहाँ गुरु नानक के संदेश—सत्य, सादगी, और सेवा—को विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में फैलाया गया, जो उनकी विचारधारा की सार्वभौमिकता को सिद्ध करता है।

सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन

गुरु नानक जयंती का उत्सव कई दिनों तक चलने वाली तैयारियों से शुरू होता है, जो इसकी गहराई और महत्व को दर्शाता है। अखंड पाठ के अलावा, गुरुद्वारों में विशेष सजावट की जाती है, जिसमें फूलों के हार, झालरें, और रंगोली शामिल होती है, जो स्थान को पवित्र और आकर्षक बनाती है। नगर कीर्तन में बैंड बाजों के साथ शबद गाए जाते हैं, और पवित्र ग्रंथ पर फूलों की वर्षा की जाती है, जो श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। लंगर सेवा का विशेष महत्व है, जहाँ सभी वर्गों के लोग—चाहे वे अमीर हों या गरीब, हिंदू हों या सिख—एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह सेवा न केवल भूख मिटाती है, बल्कि सामाजिक बंधन को मजबूत करती है और गुरु नानक की समानता की शिक्षाओं को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है।

हिमाचल प्रदेश में उत्सव में स्थानीय लोक नृत्यों का समावेश हुआ, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करता है। पहाड़ी गीतों के साथ कीर्तन ने माहौल को और जीवंत बना दिया, जहाँ लोग ठंडी हवाओं के बीच भी नृत्य और संगीत में डूब गए। पांवटा साहिब में गुरुद्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े इतिहास ने इस उत्सव को और गहराई प्रदान की, जहाँ हिंदू और सिख समुदाय एक साथ प्रार्थना करते हैं और आपसी प्रेम का संदेश फैलाते हैं। इसी तरह, मंडी में शिवरात्रि जैसे अन्य धार्मिक उत्सवों की तरह, गुरु नानक जयंती भी एक सांप्रदायिक उत्सव के रूप में मनाई गई, जहाँ स्थानीय लोग अपने परंपरागत वेशभूषा में शामिल हुए और उत्सव को रंगों से भर दिया।

गुरु नानक के पर्यावरणीय संदेश

गुरु नानक देव जी के उपदेश केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देते हैं, जो आधुनिक युग में उनकी प्रासंगिकता को बढ़ाता है। उन्होंने पृथ्वी को पोषण करने वाली माता के रूप में वर्णित किया और मनुष्यों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने की अपील की, जो आज पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक आंदोलनों से मेल खाती है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ नदियाँ और जंगल जीवन का आधार हैं, यह संदेश विशेष रूप से प्रासंगिक है। उत्सव के दौरान, कई संगठनों ने पौधारोपण अभियान चलाए, जो गुरु नानक की पारिस्थितिक जागरूकता को दर्शाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण की नींव रखता है।

युवाओं और बच्चों की भागीदारी

इस पर्व ने युवाओं और बच्चों को भी आकर्षित किया, जो भविष्य की उम्मीदों को दर्शाता है। स्कूलों और कॉलेजों में निबंध लेखन, चित्रकला, और क्विज प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जहाँ बच्चों ने गुरु नानक के जीवन और शिक्षाओं के बारे में सीखा और अपने विचारों को व्यक्त किया। हिमाचल के स्कूलों में, स्थानीय छात्रों ने गुरुद्वारों में सेवा की और लंगर वितरण में मदद की, जो उन्हें सिख परंपराओं और समुदाय सेवा के मूल्यों से जोड़ता है। यह भागीदारी नई पीढ़ी को सिख धर्म और गुरु नानक के संदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो लंबे समय तक इस विरासत को जीवित रखने में सहायक होगी।

वैश्विक संदर्भ

गुरु नानक जयंती केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वभर के सिख समुदाय इसे मनाते हैं, जो उनकी विचारधारा की वैश्विक अपील को दिखाता है। लंदन में ट्राफलगर स्क्वायर पर परेड, टोरंटो में भव्य जुलूस, और न्यूयॉर्क में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इस उत्सव को वैश्विक मंच प्रदान किया। इन आयोजनों में गुरु नानक के संदेश—सत्य, सादगी, और सेवा—को विभिन्न भाषाओं में फैलाया गया, जहाँ स्थानीय लोग और सिख समुदाय एक साथ आए और आपसी समझ को बढ़ाया। यह वैश्विक एकता गुरु नानक के उस सपने को साकार करती है, जहाँ सभी धर्म और संस्कृतियाँ एक साथ फलती-फूलती हैं।

चुनौतियाँ और भविष्य

हालांकि उत्सव भव्य रहा, कुछ चुनौतियाँ भी सामने आईं, जो आयोजन की जटिलताओं को दर्शाती हैं। भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण के लिए स्थानीय प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, विशेषकर बड़े शहरों और तीर्थस्थलों पर। हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दी और खराब मौसम ने भी आयोजनों को प्रभावित किया, जहाँ बर्फबारी और सड़कों पर बाधाएँ उत्पन्न हुईं। फिर भी, समुदाय की एकता और समर्पण ने इन बाधाओं को पार कर लिया, और लोगों ने उत्साह के साथ उत्सव को सफल बनाया। भविष्य में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इन उत्सवों को और व्यापक बनाने की संभावना है, जहाँ लोग ऑनलाइन कीर्तन और प्रार्थना में हिस्सा ले सकें और वैश्विक स्तर पर जुड़ाव बढ़े।

श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व देशभर में एकता, श्रद्धा, और उत्सव का प्रतीक बना। हिमाचल प्रदेश से लेकर दक्षिण भारत तक, और विदेशों में भी, इस पर्व ने मानवता के मूल्यों को जीवंत किया और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया। हिमाचल न्यूज द्वारा प्रसारित इस समाचार ने देश के विभिन्न हिस्सों से उत्सव की झलकियाँ प्रस्तुत की, जो गुरु नानक के संदेश को फैलाने में सहायक रही और लोगों को उनके जीवन और शिक्षाओं से जोड़ा। यह उत्सव न केवल सिख समुदाय का गौरव है, बल्कि समस्त मानवता के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है, जो हमें सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और भविष्य के लिए एक बेहतर समाज की कल्पना को मजबूत करता है।

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