Post by : Shivani Kumari
वित्त वर्ष 2025 की अक्टूबर माह भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। जीएसटी के नए सुधार, जिन्हें GST 2.0 कहा जाता है, के लागू होते ही वाहनों की बिक्री में अभूतपूर्व तेजी देखी गई। विशेषकर छोटी कारों पर लगाए गए करों की दर को 28% से घटाकर 18% करने के कारण बाजार में मांग भारी बढ़ी, जिससे देश भर के खरीदार उत्साह के साथ खरीदारी में जुट गए।
जीएसटी सुधारों ने न केवल छोटे कारों बल्कि दोपहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी कर दरों को कम किया, जिससे इन क्षेत्रों में भी बढ़ोतरी देखी गई। त्योहारों के सीजन में नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे उत्सवों के साथ यह सुधार अभूतपूर्व व्यापार वृद्धि का कारण बना। गांव और छोटे शहरों में खरीदारों की संख्या में यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि सुधारों ने आम आदमी की खरीद क्षमता में सुधार किया है।
मारुति सुजुकी, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी, ने अक्टूबर 2025 में लगभग 4 लाख से अधिक यूनिट्स की बिक्री दर्ज की जिसमें छोटी कारों की बिक्री में 30% तक की वृद्धि हुई। टाटा मोटर्स ने अपनी बिक्री में 33% से अधिक का उछाल देखा, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में 37% की बढ़ोतरी हुई। महिंद्रा, हुंडई और किआ जैसे ब्रांड्स ने भी अपनी रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज कर बाजार में नई उम्मीदें जगाई।
GST 2.0 के तहत टैक्स स्लैब को और सरल बनाया गया है, जिसमें अब केवल तीन मुख्य टैक्स दरें हैं: 5%, 18%, और 40%। छोटी कारों का टैक्स 18% पर स्थिर हो गया है, जबकि लक्जरी और बड़े वाहन 40% टैक्स के अंतर्गत आए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों पर विशेष रूप से 5% टैक्स दर लागू रहना इनके विस्तार को बेहतर बना रहा है।
दोहिया वाहनों पर भी करों की दरों में कमी आई है। 350cc तक के मोटरसाइकिलों को 18% टैक्स स्लैब में रखा गया है, जबकि अधिक पावर वाली बाइक को 40% टैक्स लेना होगा। टैक्टरों पर कर दर 12% से घटाकर 5% की गई है, जिससे कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक मांग देखी जा रही है।
वाणिज्यिक वाहनों जैसे बस, ट्रकों, और अन्य भारी वाहनों पर लगाया गया कर 28% से घटाकर 18% किया गया है, जिससे इन वाहनों की कीमत में कमी आई है और छोटे एवं मध्यम व्यवसायों को फायदा हुआ है। इसके साथ ही टैक्स संरचना को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे कंपनियों और ग्राहकों दोनों को सुगमता मिली है।
इस सुधार ने न केवल बिक्री में वृद्धि की है, बल्कि उत्पादन श्रृंखला को भी सुचारू बनाया है। आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से वाहन निर्माता कंपनियों को उत्पादन में तेजी लाने में मदद मिली है, जिससे ग्राहक डीलरशिप पर जल्दी वाहन प्राप्त कर पा रहे हैं।
राज्य सरकारों ने भी इस सुधार का समर्थन किया है, जिससे वाहनों के पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाएं भी सरल हुई हैं। इससे उद्योग में निवेश के अवसर बढ़े हैं और रोजगार सृजन में तेजी आई है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस तेजी के बीच वाहन उद्योग के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं जैसे कि कच्चे माल की कीमतों में परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक अस्थिरताएं, और प्रतिस्पर्धा की बढ़ती तीव्रता। फिर भी, GST 2.0 ने मांग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे देखेंगे तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह सुधार भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र की विकास यात्रा के लिए एक स्थायी रिसॉर्ट साबित होगा, जिससे न केवल उपभोक्ता बल्कि व्यवसायिक क्षेत्र भी मजबूती से उन्नति करेगा। यह कदम 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' योजनाओं के उद्देश्यों को भी सशक्त करेगा।
अंत में, भारत के ऑटो सेक्टर की इस अभूतपूर्व सफलता ने निर्यात में नई उम्मीदें जगाई हैं, जहां घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता और मांग दोनों में सुधार हो रहा है। इस प्रकार, GST 2.0 सुधारों ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को एक नई उन्नति की ओर अग्रसरित किया है।
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