भुना चना: मधुमेह और रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए विश्वसनीय सेहतमंद स्नैक
भुना चना: मधुमेह और रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए विश्वसनीय सेहतमंद स्नैक

Post by : Shivani Kumari

Oct. 14, 2025 3:29 p.m. 888

हिमाचल प्रदेश में जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, वहीं वर्ष 2025 में भुना चना रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए एक विश्वसनीय और स्वास्थ्यवर्धक स्नैक के रूप में नया महत्व प्राप्त कर चुका है। स्थानीय पोषण विशेषज्ञ, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और समुदाय के स्वास्थ्य समर्थक मधुमेह से जूझ रहे लोगों को भुना चना खाने की सलाह दे रहे हैं।

हिमाचल की पारंपरिक आहार में भुना चना, जिसे भुना चना या भुने हुए चने के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से शामिल रहा है। यह सस्ता, पौष्टिक और सुविधाजनक स्नैक माना जाता है। लेकिन जैसे-जैसे प्रोसेस्ड और मीठे स्नैक्स बढ़े, स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी मधुमेह के बढ़ते मामलों को लेकर चिंतित हुए। इसके परिणामस्वरूप फिर से पोषणयुक्त और स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थों जैसे भुने चने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

मुख्य कहानी

भुना चना का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) मात्र 28 है, जो इसे धीरे पचने वाला भोजन बनाता है और रक्त शर्करा के अचानक बढ़ने से बचाता है। यह प्रोटीन और आहार फाइबर से भरपूर होता है, जिससे भूख नियंत्रित रहती है, ग्लूकोज स्थिर होता है और पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही, इसमें मैग्नीशियम, पोटैशियम, और आयरन जैसे आवश्यक खनिज होते हैं, जो चयापचय और इंसुलिन के कार्य में मदद करते हैं।

भुना चना न केवल पेट भरने वाला और कम कैलोरी वाला है, बल्कि हिमाचल के स्थानीय बाजारों में आसानी से उपलब्ध और सस्ता भी है। पोषण संबंधी अध्ययन बताते हैं कि टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त लोगों ने भुना चना जैसे उच्च फाइबर वाले स्नैक्स को आहार में शामिल करने से भोजन के बाद रक्त शर्करा के बढ़ने में 30% तक कमी देखी है।

विशेषज्ञ की राय

डॉ. शिवानी मेहता, पोषण विशेषज्ञ (शिमला): “भुना चना हिमाचल के आहार में अपने कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उच्च फाइबर के कारण मधुमेह नियंत्रण और वजन प्रबंधन के लिए व्यावहारिक विकल्प है।”

डॉ. आर.पी. शर्मा, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (धर्मशाला): “भुना चना को स्नैक्स और भोजन में शामिल करने से रक्त शर्करा स्थिर रहता है और ऊर्जा लगातार बनी रहती है, जो मधुमेह या प्रीमधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए आवश्यक है।”

जन प्रतिक्रिया

हिमाचल के कस्बों और गांवों में भुना चना को फिर से खूब सराहा जा रहा है। स्थानीय दुकानें, परिवार के रसोईघर और सामुदायिक आयोजन इस स्नैक को प्रदर्शित कर रहे हैं, जिसे डॉक्टर और सोशल मीडिया प्रभावक भी सुझा रहे हैं। हिमाचल के लोग पारंपरिक, स्वास्थ्यवर्धक और सस्ते इस भोजन पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

प्रभाव विश्लेषण

भुना चना को दैनिक स्नैक के रूप में अपनाना हिमाचल में मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। यह जनता के स्वास्थ्य का समर्थन करता है, रक्त शर्करा नियंत्रित रखने और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा पर खर्च में कमी आ सकती है और सभी उम्र के लोगों की भलाई बढ़ सकती है। यह प्रवृत्ति पारंपरिक, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों की ओर लौटने का संकेत भी देती है, जो सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करते हुए आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करती है।

भुना चना साबित करता है कि हिमाचल के अपने खाद्य पदार्थ मधुमेह से लड़ाई में शक्तिशाली सहयोगी हो सकते हैं। इसका कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, उच्च फाइबर और प्रोटीन इसे रक्त शर्करा और वजन नियंत्रण के लिए आदर्श बनाते हैं। जैसे-जैसे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ रही है, भुना चना हिमाचल के स्नैक संस्कृति में अपनी जगह मजबूती से बना रहा है—जो सेहत और स्थानीय गौरव दोनों प्रदान करता है।

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