Post by : Himachal Bureau
सोलन के आरएलए कार्यालय में वाहन पंजीकरण को लेकर एक बड़ा डिजिटल फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। आरएलए पोर्टल पर फर्जी आईडी बनाकर 40 से अधिक बाहरी राज्यों के वाहनों का सोलन के फर्जी पते पर पंजीकरण किया गया। शुरुआती जांच में मिले आंकड़े चौंकाने वाले हैं और अधिकारियों को आशंका है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।
जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर 2025 को आरएलए सोलन के वाहन पोर्टल पर दो फर्जी आईडी बनाई गईं। इन आईडी का उपयोग करके मात्र ढाई महीने के भीतर लगभग 40 वाहनों का पंजीकरण कर दिया गया। इनमें कॉमर्शियल वाहन, टैक्सी और निजी वाहन सभी शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन वाहनों का एमवीआई वेरिफिकेशन अनिवार्य होने के बावजूद बिना फिजिकल जांच के पंजीकरण कर नए नंबर जारी कर दिए गए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के तीन ट्रालों का पंजीकरण सोलन के केवल शामती पते पर किया गया। इसके बाद इन्हें आरएलए झंडूता स्थानांतरित किया गया। इस प्रक्रिया में वाहनों की भार सीमा में नियमों के विरुद्ध बदलाव किए जाने की भी जानकारी मिली।
सोलन में पते में केवल "शामती" लिखा होना और स्थानीय जानकारी का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि यह किसी संगठित गिरोह और संभावित अंदरूनी मिलीभगत का काम हो सकता है। एसडीएम सोलन ने पूरे मामले की रिपोर्ट पुलिस विभाग को सौंप दी है।
परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईसी दिल्ली से पोर्टल का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। पोर्टल का निर्माण और निगरानी दिल्ली से ही की जाती है। डीसी सोलन मनमोहन शर्मा ने पुष्टि की है कि इस मामले की जांच जारी है और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया जाएगा।
जांच के दौरान और आगे खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि फर्जीवाड़े में किसी भी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस तरह के घोटाले से न केवल वाहन पंजीकरण प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि आम जनता के लिए भी यह सुरक्षा और ट्रस्ट का मुद्दा बन सकता है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जांच टीम पोर्टल लॉग, फर्जी आईडी, पंजीकरण रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के हस्तक्षेप की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य जिलों के वाहनों के साथ भी इसी तरह के फर्जी पंजीकरण किए गए हैं।
इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सख्त निगरानी और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या फर्जी वाहन पंजीकरण की जानकारी मिलने पर तुरंत परिवहन विभाग या पुलिस को सूचित करें।
जांच पूरी होने के बाद न केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि पोर्टल और पंजीकरण प्रणाली में सुरक्षा के नए उपाय भी लागू किए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला सोलन और हिमाचल प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा पर ध्यान न दिया गया तो बड़े पैमाने पर fraud और भ्रष्टाचार की संभावना बनी रहती है।
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