54 साल बाद झडग में शांत महायज्ञ का आगाज़, नागेश्वर देवता के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
54 साल बाद झडग में शांत महायज्ञ का आगाज़, नागेश्वर देवता के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

Post by : Khushi Joshi

Dec. 5, 2025 12:22 p.m. 1544

जुब्बल उपमंडल के झडग क्षेत्र में 54 वर्षों से प्रतीक्षित शांत महायज्ञ की शुरुआत गुरुवार को भक्तिमय माहौल के बीच हुई। तीन दिन तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। नागेश्वर देवता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए सुबह से ही दूर-दूर से भक्तों का जत्था झडग पहुंचने लगा।

इस विशेष अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिरकत की और इस ऐतिहासिक समारोह के साक्षी बनकर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान ही देव संस्कृति और परंपराओं से है, इसी कारण यह प्रदेश देवभूमि कहलाता है। नागेश्वर देवता न केवल बुशहर, बल्कि जुब्बल क्षेत्र के भी आराध्य देव हैं और इतने लंबे अंतराल के बाद शांत महायज्ञ का फिर से आयोजित होना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ अवसर है।

महायज्ञ की गरिमा इस बात से और बढ़ जाती है कि बुशहर क्षेत्र के लगभग 20 देवता इस आयोजन में शामिल हुए हैं। देव संस्कृति में आस्था रखने वालों के लिए यह धार्मिक संगम किसी पर्व से कम नहीं है।

आयोजन के दौरान सुरक्षा और सुविधा का पूरा प्रबंध किया गया है। पुलिस, अग्निशमन, जलशक्ति, विद्युत विभाग और अन्य टीमें लगातार व्यवस्था संभाले हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जुब्बल और रोहडू से विशेष बस सेवाएँ चलाई जा रही हैं और ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखने के लिए अलग प्लान लागू किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि नागेश्वर देवता का आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है और उन्होंने देवता से क्षेत्र की उन्नति, शांति व समृद्धि की कामना की। उन्होंने आयोजन समिति, देवता कमेटी और पंचायत प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह अवसर प्रेरणा बनेगा, ताकि वे अपनी विरासत को आगे बढ़ा सकें।

इस कार्यक्रम के बाद मंत्री ने पब्बर नदी से जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए बनाई जा रही उठाऊ जलापूर्ति योजना का निरीक्षण भी किया। कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। इस दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधि और गणमान्य भी उपस्थित रहे।

तीन दिन तक चलने वाला यह शांत महायज्ञ धार्मिक विश्वास के साथ-साथ क्षेत्रीय भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर स्मरणीय साबित होगा। श्रद्धालु उम्मीद कर रहे हैं कि इस आयोजन से क्षेत्र में खुशहाली और आस्था का प्रकाश और अधिक उज्ज्वल होगा।

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