HAS प्रोबेशनर्स से राज्यपाल की मुलाकात, ईमानदारी, तकनीक और सेवा पर दिया बड़ा संदेश
HAS प्रोबेशनर्स से राज्यपाल की मुलाकात, ईमानदारी, तकनीक और सेवा पर दिया बड़ा संदेश

Post by : Himachal Bureau

July 10, 2026 noon 120

शिमला स्थित लोक भवन में वर्ष 2025 बैच के हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) और संबद्ध सेवाओं के 27 प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल कविंद्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। सभी अधिकारी इन दिनों डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA), शिमला में छह सप्ताह के फाउंडेशन कोर्स का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस दौरान राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद करते हुए उन्हें भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए और प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने की प्रेरणा दी।

ईमानदारी और पारदर्शिता को बताया सबसे बड़ी ताकत

राज्यपाल ने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी केवल सरकारी कर्मचारी नहीं होता, बल्कि सरकार और आम जनता के बीच विश्वास का मजबूत माध्यम होता है। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को राज्य सिविल सेवा में चयन होने पर बधाई दी और कहा कि यह पद केवल सम्मान का नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने का बड़ा अवसर भी है।

उन्होंने अधिकारियों से अपने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता देने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि लोगों का विश्वास तभी मजबूत होता है जब अधिकारी संविधान, कानून और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सफल अधिकारी वही होता है जो बिना किसी भेदभाव के जनता के हित में काम करे।

प्रशिक्षण काल को बताया सबसे महत्वपूर्ण समय

कविंद्र गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण का समय हर अधिकारी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी दौरान प्रशासनिक सोच विकसित होती है, नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है और सही निर्णय लेने की योग्यता तैयार होती है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं और अपने ज्ञान तथा अनुभव को लगातार बढ़ाते रहें।

उन्होंने अधिकारियों को अनुशासन, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ अपने करियर की शुरुआत करने की सलाह दी। उनका कहना था कि भविष्य में आने वाली हर चुनौती को सीखने और समाज की बेहतर सेवा करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

हिमाचल की चुनौतियों को समझने की दी सलाह

राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां प्रशासनिक कार्य सामान्य राज्यों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं। दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं को समय पर पहुंचाना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ऐसी कार्यशैली अपनानी चाहिए जिससे हर नागरिक तक सरकारी सेवाएं आसानी से पहुंच सकें। इसके लिए संवेदनशीलता, नवाचार और जनहित की भावना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

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प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार रहने पर दिया जोर

राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भूस्खलन, बादल फटना, भारी बारिश और जलवायु परिवर्तन जैसी घटनाएं प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे में अधिकारियों को हर समय तैयार रहना चाहिए ताकि आपदा की स्थिति में लोगों तक तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रशासनिक नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा भी होती है। इसलिए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर योजना के साथ कार्य करना चाहिए।

जनता की समस्याएं सुनने की दी सलाह

राज्यपाल ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे हमेशा आम लोगों के लिए उपलब्ध रहें और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान उसका व्यवहार और जनता के प्रति उसका दृष्टिकोण होता है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि शिकायतों का समय पर समाधान करें और लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। इससे प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

तकनीक और ई-गवर्नेंस अपनाने पर जोर

अपने संबोधन में राज्यपाल ने आधुनिक प्रशासन में तकनीक की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बना सकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देकर सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में अधिकारियों की भूमिका

राज्यपाल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि अच्छी शासन व्यवस्था, जनभागीदारी, नवाचार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करने का आह्वान किया।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील

राज्यपाल ने हिमाचल में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार की प्राकृतिक खेती से जुड़ी योजनाओं को गांव-गांव तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) की निदेशक रूपाली ठाकुर ने छह सप्ताह के फाउंडेशन कोर्स की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य और विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया। वहीं, प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी राज्यपाल के साथ अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज और सहायक पाठ्यक्रम निदेशक संदीप शर्मा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने अंत में सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ईमानदारी, सेवा भावना और जिम्मेदारी के साथ किया गया कार्य ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान बनता है।

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