शिमला प्रेस वार्ता में बजट और आरडीजी पर बोले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
शिमला प्रेस वार्ता में बजट और आरडीजी पर बोले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 9, 2026 10:50 a.m. 2477

रविवार को राजधानी शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र सरकार के बजट और उसकी प्राथमिकताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बजट में देश के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए सात प्रमुख आधार स्तंभ तय किए हैं, जिनके माध्यम से भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बजट के सात मुख्य स्तंभों में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देना, विरासत संरक्षण, एमएसएमई सशक्तिकरण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, सतत विकास और आर्थिक स्थिरता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सातों क्षेत्रों पर केंद्रित नीतियां आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक दिशा और गति तय करेंगी।

प्रेस वार्ता के दौरान गजेंद्र सिंह शेखावत ने आरडीजी (Revenue Deficit Grant) को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसकी व्यवस्था मूल रूप से अस्थायी राहत के रूप में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गंभीर वित्तीय घाटे से जूझ रहे राज्यों को सीमित समय के लिए सहारा देना था। उन्होंने बताया कि यह प्रावधान 12वें वित्त आयोग से शुरू हुआ और इसे आगे बढ़ाते समय बार-बार यह चेतावनी दी गई कि इसे स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के दौरान कोविड जैसी असाधारण परिस्थितियों में राज्यों को फ्रंट-लोडेड और रिकॉर्ड स्तर की वित्तीय सहायता दी गई। इस अवधि में हिमाचल प्रदेश को भी पहले की सभी अवधियों की तुलना में कहीं अधिक आरडीजी सहायता प्राप्त हुई, जिससे राज्य को महामारी के दौरान वित्तीय प्रबंधन में बड़ी मदद मिली।

उन्होंने कहा कि अब वित्त आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निरंतर अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय राज्यों को अपने राजस्व संसाधन बढ़ाने और व्यय अनुशासन अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय घाटा आय और व्यय के अंतर से जुड़ा विषय है और इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से ही ठीक किया जा सकता है।

शेखावत ने चिंता जताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश का कर्ज-जीडीपी अनुपात 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना एक चेतावनी संकेत है। उन्होंने कहा कि राज्य को दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ठोस और अनुशासित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों पर अत्यधिक ऋण का बोझ न पड़े।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के नए फॉर्मूले के तहत कर हिस्सेदारी (Devolution) में संरचनात्मक वृद्धि की है। इससे हिमाचल जैसे राज्यों को अधिक हिस्सा मिल रहा है, जिससे आरडीजी घटने के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है, बशर्ते राज्य सरकारें वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करें।

प्राकृतिक आपदाओं के मुद्दे पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ फंड में पिछले वर्षों में कई गुना वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि अब राज्यों को न केवल राहत कार्यों, बल्कि आपदा-पूर्व तैयारी और प्रिवेंटिव उपायों पर भी इन फंड्स के उपयोग की अनुमति दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में आपदा-पूर्व तैयारी पर अधिक निवेश किया जाए।

हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिए लगातार सहयोग दिया है। हाल ही में विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत हिमाचल को पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 50 वर्ष की अवधि का ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण स्वीकृत किया गया है, जो व्यवहारिक रूप से अनुदान के समान है।

उन्होंने बताया कि स्वदेश दर्शन, प्रसाद योजना, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत भी हिमाचल प्रदेश को निरंतर सहायता मिल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी यदि राज्य सरकार व्यवहारिक परियोजना प्रस्ताव भेजती है, तो केंद्र सरकार सहयोग जारी रखेगी।

सेब और कृषि से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस अनावश्यक भ्रम फैला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहर से आने वाला सेब ₹100 से कम लैंडिंग कीमत पर भारत नहीं आ सकता। लगभग ₹80 न्यूनतम बेस प्राइस और उस पर ₹20 से ₹40 तक टैक्स जुड़ने के बाद ही आयात संभव है। ऐसे में स्थानीय बागवानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन नीतियों से न केवल देश, बल्कि हिमाचल प्रदेश भी व्यापक रूप से लाभान्वित होगा।

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