Author : Rajesh Vyas
पालमपुर: आजकल परोर-खड़ोट पंचायतें इसी इमारत परिसर से मिट्टी निकाले जाने को लेकर आमने-सामने हैं। मिट्टी निकाली गई, फोर लाइन सड़क के निर्माण कार्य पर किसी ने थोड़ी जमीन पर कब्जा कर लिया। बेहतर होता कि ये पंचायतें इस मिट्टी को उठाने के बजाय इसी परिसर में विकास में जन सहयोग योजना के तहत बनी इतनी बड़ी इमारत पर अपना हक जताते हुए इसकी सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर आमने-सामने आतीं।
यह प्रतिक्रिया समाज सेवा में समर्पित इन्साफ संस्था के अध्यक्ष एवं पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने व्यक्त की। उन्होंने इन पंचायतों को स्मरण करवाया कि किस तरह नब्बे के दशक में इसी प्रांगण की तय जमीन को लेकर बड़ा जनआंदोलन हुआ था। तत्कालीन खड़ोट पंचायत के प्रधान पंडित ओंकार नाथ शर्मा के नेतृत्व में संघर्ष समिति का गठन हुआ था, जिसमें वे बतौर महामंत्री अठारह पंचायतों की जनता को लेकर सड़कों पर उतरे थे।
प्रवीन कुमार ने बताया कि 36 दिनों तक भूखे-प्यासे, कभी अनशन पर, कभी सड़क पर, तो कभी थाने की दहलीज पर यह आंदोलन उग्र रूप धारण कर गया था। अंततः उस वक्त की राजा वीरभद्र सिंह सरकार इस बड़े आंदोलन के दबाव में झुकी और यहां कॉलेज बनाने की घोषणा की। इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए और प्रदेश में प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। नए शरद सत्र के दौरान धर्मशाला में परोर के राष्ट्रीय उच्च मार्ग से गुजरते इसी संघर्ष समिति ने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का ढोल, नगाड़ों और बैंड बाजे के साथ भव्य स्वागत किया।
पूर्व विधायक ने बताया कि उस समय भारी जनसैलाब देखकर प्रो. धूमल ने कहा था, "इतनी जनता तो खुद ही भवन बना सकती है। आप भवन बनाओ, सरकार आपको कॉलेज देगी।" इस चुनौती को स्वीकार करते हुए संघर्ष समिति ने गांव-गांव जाकर धन संग्रह किया और विकास में जन सहयोग योजना के तहत लाखों रुपये की यह बड़ी इमारत बनवाई।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ग्रामीण जनता को दी गई चुनौती के आगे झुकना पड़ा और नए कॉलेज के बजाय पालमपुर के कॉलेज को यहां शिफ्ट करने के आदेश जारी किए गए। अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम वत्तरा के नाम इस कॉलेज को लेकर शहीद के पिता जी एल वत्तरा की तर्कसंगत फरियाद के आगे सरकार को झुकना पड़ा और कॉलेज फिर पालमपुर स्थानांतरित हो गया।
प्रवीन कुमार ने कहा कि ढाई दशक से यह भवन सरकारों के आवागमन की नालायकी पर आंसू बहा रहा है। उन्होंने दोनों पंचायतों के प्रतिनिधियों से कहा कि मिट्टी उठाने के विवाद को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय इस भवन की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाएं।
उन्होंने बताया कि इतनी शानदार इमारत की छत पर बिछाई गई टीन जंग खा रही है। यह भवन विकास में जन सहयोग योजना के तहत सभी के अथक प्रयासों और आर्थिक सहयोग से बनी है। यह हमारा सामूहिक भवन है। दोनों पंचायतें मिलकर इसे मिनी सचिवालय के रूप में या मांगलिक कार्यों के लिए नियमों और मापदंडों के अनुरूप आवेदन करके व्यवसायिक गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे यह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर भवन दोनों पंचायतों के लिए आय का स्रोत बन सकेगा।
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