बंजार के शिल्ली हाई स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
बंजार के शिल्ली हाई स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

Author : Prem Sagar

April 8, 2026 6:18 p.m. 113

कुल्लू जिले के बंजार शिक्षा खंड के अंतर्गत आने वाला राजकीय उच्च पाठशाला शिल्ली इन दिनों गंभीर शिक्षकीय संकट से जूझ रहा है। स्कूल में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण शिक्षक पद खाली पड़े हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य खतरे में पड़ गया है। इस समस्या की वजह से लगभग 60 छात्र अब अपने ही गांव का स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हो रहे हैं।

वर्तमान में विद्यालय में केवल तीन शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें एक मुख्य अध्यापक, एक टीजीटी आर्ट्स और एक टीजीटी हिंदी शामिल हैं। अन्य सभी विषयों के पद वर्षों से खाली पड़े होने की वजह से छात्रों को सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है।

वर्षों से खाली पड़े शिक्षक पद

जानकारी के अनुसार, स्कूल में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं। जैसे:

  • मेडिकल शिक्षक – जुलाई 2022 से
  • नॉन-मेडिकल शिक्षक – जुलाई 2024 से
  • संस्कृत शिक्षक – मार्च 2022 से
  • पीईटी शिक्षक – 2016 से
  • कला शिक्षक – अगस्त 2003 से

इसके अलावा, स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद भी वर्ष 2012 से खाली है, जिससे स्कूल के दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। स्कूल में पाँच कक्षाओं के लिए केवल दो कमरे हैं, जिनमें बच्चों की पढ़ाई और कार्यालय का काम भी किया जाता है। इससे बच्चों को बैठने और पढ़ने में कठिनाइयाँ हो रही हैं और पढ़ाई का माहौल बिगड़ गया है।

अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता

अभिभावक कह रहे हैं कि शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। इसी वजह से कई अभिभावक अपने बच्चों को अन्य स्कूलों में भेजने पर विचार कर रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस समस्या को शिक्षा विभाग और सरकार के सामने कई बार उठाया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी रिक्त पद जल्दी भरे जाएं और स्कूल भवन की दूसरी मंजिल के निर्माण के लिए उचित बजट उपलब्ध कराया जाए।

इस मामले में मोहर सिंह ठाकुर पूर्व उप प्रधान, सरणु राम, भीमसेन, भागचंद, गोविंद सिंह, रंजीत सिंह, योगराज, एसएमसी प्रधान दिलीप सिंह, कांता देवी, जयचंद, दूर सिंह, बहादुर सिंह, ओम प्रकाश, सीता देवी, मदन लाल, नरोत्तम सिंह, जीतराम, यशपाल, पदम सिंह और मेहर चंद सहित कई ग्रामीणों ने अपनी चिंता जाहिर की।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। अब यह देखने की बात है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब तक ध्यान देते हैं, ताकि गांव के बच्चों को अपने ही स्कूल में बेहतर शिक्षा मिल सके और उन्हें स्कूल छोड़कर कहीं और न जाना पड़े।

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