Post by : Himachal Bureau
चंबा के भरमौर-होली क्षेत्र में मंगलवार सुबह निर्माणाधीन सिंयूर पुल अचानक भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। पुल भरमौर और होली क्षेत्र की दो पंचायतों को जोड़ रहा था और इसके पूरा होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली थी। सुबह करीब 8 बजे क्षेत्रवासियों ने भूकंप जैसी आवाज सुनी और मौके पर पहुंचे तो देखा कि पुल पूरी तरह रावी नदी में गिर चुका था।
करीब 6.12 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा यह पुल 80 प्रतिशत तक तैयार हो चुका था। पुल के गिरने से क्षेत्र की लगभग 5,000 लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। अब लोगों को भरमौर पहुंचने के लिए पहले की तुलना में लगभग 26 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त मार्ग तय करना होगा, जबकि पहले यह दूरी 18-20 किलोमीटर थी। फिलहाल छोटे वाहनों और पैदल आवाजाही के लिए पुराने लकड़ी के पुल का ही सहारा लिया जा रहा है। सौभाग्य से हादसे के समय पुल पर कोई कामगार या राहगीर मौजूद नहीं था, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने पुष्टि की कि पहाड़ी से गिरने वाली चट्टानों के कारण पुल ध्वस्त हुआ और इसमें किसी की लापरवाही नहीं पाई गई। उन्होंने संबंधित विभाग को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि उन्हें पुल गिरने की सूचना मिलते ही तत्काल संबंधित विभाग को कार्यवाही के लिए निर्देश दिए गए। पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा हमेशा रहता है, इसलिए पुल की सुरक्षा के लिए भविष्य में और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
इस हादसे से क्षेत्रवासियों में डर और असुरक्षा का माहौल है। पुल के ध्वस्त होने से न केवल आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि स्थानीय बाजारों और ग्रामीण इलाकों में दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द पुल की मरम्मत और पुनर्निर्माण किया जाएगा ताकि लोगों की परेशानियों में कमी लाई जा सके।
स्थानीय लोग इस घटना से काफी चिंतित हैं। कई लोगों ने कहा कि पुल के बिना रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने लकड़ी के पुल पर भी छोटे वाहन और पैदल आवाजाही सीमित है, जिससे सुरक्षा का खतरा बना रहता है।
इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया जाना चाहिए। प्रशासन ने कहा कि नए पुल का निर्माण और मजबूत बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द मौके पर पहुंचेगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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