किन्नौर के भावानगर में पहाड़ से अचानक भारी मलबा और चट्टानें गिरीं, बड़ा हादसा टला
किन्नौर के भावानगर में पहाड़ से अचानक भारी मलबा और चट्टानें गिरीं, बड़ा हादसा टला

Post by : Himachal Bureau

May 12, 2026 3:57 p.m. 116

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित भावानगर क्षेत्र में आज एक बेहद डरावनी लेकिन राहत भरी घटना सामने आई, जहां एक बड़ा प्राकृतिक हादसा टल गया। सुबह के समय अचानक पहाड़ की ढलान से भारी मात्रा में चट्टानें और मलबा नीचे गिरने लगा, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही मिनटों में हुआ और लोग डर के कारण सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

घटना के दौरान पहाड़ से लगातार मलबा गिर रहा था, जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि बड़ा भूस्खलन पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा। लेकिन इसी दौरान एक विशाल चट्टान ने नीचे आते हुए मलबे का रास्ता रोक दिया। इस चट्टान ने प्राकृतिक ढाल बनकर पूरे मलबे को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। लोगों का कहना है कि अगर यह चट्टान रास्ते में न आती, तो पूरा इलाका भारी तबाही का सामना कर सकता था। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि किन्नौर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर मौसम बदलने के साथ ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन इस बार स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। लोगों ने राहत की सांस ली क्योंकि पूरा मलबा नीचे बस्तियों तक नहीं पहुंच सका। घटना के बाद ग्रामीणों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और एक-दूसरे को सुरक्षित रहने की सलाह दी।

इस घटना के बाद पूरे भावानगर इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद स्थानीय टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रास्ते में गिरे मलबे को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि यातायात बहाल किया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि यह घटना एक प्राकृतिक लैंडस्लाइड का हिस्सा हो सकती है, क्योंकि हाल के दिनों में क्षेत्र में मौसम में बदलाव और हल्की बारिश देखी गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और पहाड़ी ढलानों के पास न जाने की सलाह दी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में ऐसे इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस पूरी घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से खतरा पैदा कर सकती हैं, लेकिन कभी-कभी प्रकृति ही किसी बड़े नुकसान को रोकने का माध्यम भी बन जाती है।

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