Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में तेजी से फैल रहे नशे के कारोबार और खासकर चिट्टा तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि सरकार नशा तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ेगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। इसी कड़ी में राज्य के 31 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जिनमें 21 पुलिस कर्मचारी भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने नारकोटिक्स समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पाए गए कुल 123 सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए कठोर कदम लगातार जारी रहेंगे। सरकार की यह कार्रवाई चिट्टा तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नशा कारोबार युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य के परिवहन निगम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, बिजली बोर्ड, बैंकिंग संस्थानों, जल शक्ति विभाग और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी नशा कारोबार से जुड़ा पाया गया तो उसके खिलाफ तुरंत कठोर कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा माफिया के खिलाफ पूरे प्रदेश में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक नशीले पदार्थ नियंत्रण कानून के तहत 6811 मामले दर्ज किए गए हैं और 10 हजार से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए हैं।
सरकार के अनुसार हिमाचल प्रदेश इस समय देश में नशा माफिया के खिलाफ सबसे ज्यादा निवारक कार्रवाई करने वाले राज्यों में शामिल हो चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल पुलिस लगातार बड़े तस्करी नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हुई है और अपराधियों की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा 76 अवैध संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और कई मामलों में उन्हें गिराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों को तुरंत ध्वस्त किया जाए।
सरकार अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि युवाओं को नशे से बाहर निकालने के लिए पुनर्वास सुविधाओं पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला के मशोबरा में नया नशा मुक्ति केंद्र जल्द शुरू होगा, जबकि टांडा मेडिकल कॉलेज में भी पुनर्वास केंद्र खोला जाएगा। सरकार का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और आने वाले समय में नशीले पदार्थ कानून के तहत और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि हिमाचल को नशा मुक्त बनाया जा सके।
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