Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे चिट्टा और नशे के कारोबार को रोकने के लिए अब और सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब सरकारी नौकरी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से पहले चिट्टा टैस्ट करवाना अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का मानना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि वर्ष 2025 में हुई 1300 पुलिस जवानों की भर्ती से पहले भी इस तरह का टैस्ट करवाया गया था। अब मेडिकल प्रमाण पत्र में चिट्टा जांच के लिए अलग से कॉलम जोड़ा जाएगा ताकि नशे की जांच अनिवार्य रूप से हो सके।
सरकार के अनुसार यदि कोई विद्यार्थी चिट्टा टैस्ट में नशे का सेवन करते हुए पाया जाता है तो पहले उसका पुनर्वास कराया जाएगा और उसके बाद उसे अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें नशे से बाहर निकालने पर भी ध्यान दे रही है। प्रदेश की 234 पंचायतों को नशा माफिया और चिट्टा कारोबार की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। सरकार ने इन्हें लाल, पीली और हरी श्रेणी में विभाजित किया है। सबसे अधिक संवेदनशील पंचायतें कुल्लू, बिलासपुर, मंडी और बद्दी क्षेत्रों में पाई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में चिट्टा कारोबार से जुड़े करीब 12 हजार लोगों की पहचान की जा चुकी है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा नशीले पदार्थ नियंत्रण कानून के तहत 6811 मामले दर्ज कर 10 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने दावा किया कि वर्तमान कार्यकाल में राज्य में हिमाचल पुलिस द्वारा 45 हजार किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान आने वाले समय में और तेज किया जाएगा।
सरकार 1 जून से 20 अगस्त तक चिट्टा मुक्त अभियान का दूसरा चरण भी शुरू करने जा रही है। इस दौरान पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और मुख्यमंत्री स्वयं भी अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि नशे से जुड़े मामलों में 123 सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 10 सरकारी कर्मचारी और 21 पुलिस कर्मचारी सेवा से बर्खास्त किए जा चुके हैं।
इसके साथ ही सरकार ने अवैध दवाइयां बेचने वाले दुकानदारों और नियमों का उल्लंघन करने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नशीले पदार्थ कानून से जुड़े मामलों की जांच तेजी से पूरी की जाए और फोरेंसिक रिपोर्ट पांच दिन के भीतर उपलब्ध करवाई जाए। सरकार शिमला के मशोबरा और टांडा मेडिकल कॉलेज में पुनर्वास केंद्र भी शुरू कर रही है ताकि नशा छोड़ना चाहने वाले युवाओं को इलाज और परामर्श की बेहतर सुविधा मिल सके।
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