Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा और निर्णायक निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब अगर कोई सरकारी कर्मचारी चिट्टा (Chitta) की तस्करी या किसी ऐसे रैकेट में पकड़ा जाता है जिसमें नशीली दवाओं का अवैध लेन-देन हो, तो उसे बिना लंबी जांच के तुरंत बर्खास्त किया जाएगा। यह आदेश राज्य सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को भेजा गया है।
कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि गवर्नमेंट सर्वेंट्स को ऐसे किसी भी अवैध गतिविधि से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। निर्देश में कहा गया है कि केंद्र सरकार के CCS CCA Rules के रूल 19 के तहत अति गंभीर अपराधों के मामले में सरकारी कर्मचारियों को बिना इंक्वायरी भी बर्खास्त किया जा सकता है। हिमाचल में अब यही प्रावधान लागू किया गया है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत भी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के लिए सुरक्षित है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम राज्य सरकार की नशा मुक्त हिमाचल नीति के अनुरूप है। सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन में नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखना भी है।
राज्य सरकार पहले ही चिट्टा तस्करी में शामिल लगभग 17 पुलिस कर्मचारियों को बर्खास्त कर चुकी है। उन मामलों में केवल एफआईआर रिपोर्ट को आधार बनाया गया था और लंबी जांच की आवश्यकता नहीं पड़ी। अब इस नीति का विस्तार अन्य सरकारी कर्मचारियों पर भी किया जा रहा है। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इस नई नीति और इसकी गंभीरता के बारे में पूरी तरह अवगत कराएं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुखू ने इस कदम की पूरी समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में नशीली दवाओं के खिलाफ निर्णायक और समय पर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने बार-बार वाकथॉन और बैठकें आयोजित कर प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि चिट्टा तस्करी और अन्य नशीली दवाओं से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई न बरती जाए।
विशेष रूप से बताया जा रहा है कि अब अगर किसी सरकारी कर्मचारी पर नशीली दवाओं से संबंधित गंभीर आरोप लगते हैं, तो विभाग तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे बर्खास्त करने के अधिकार का प्रयोग करेगा। इससे पहले जैसे मामलों में कई कर्मचारियों को चेतावनी या लंबी जांच के बाद ही कार्रवाई होती थी, अब प्रक्रिया तेज और सख्त हो गई है।
राज्य सरकार का यह कदम न केवल सरकारी कर्मचारियों में अनुशासन बनाएगा, बल्कि आम जनता को भी यह संदेश देगा कि हिमाचल प्रदेश में सरकारी तंत्र और प्रशासन नशीली दवाओं के खिलाफ सख्त है। सरकार का मानना है कि ऐसे निर्णय से न केवल कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि युवा पीढ़ी को भी यह समझ में आएगा कि नशे की तस्करी और अपराध में किसी सरकारी कर्मचारी की भागीदारी की कोई गुंजाइश नहीं है।
इस दिशा में कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने विभागों में यह संदेश पहुंचाएं और सुनिश्चित करें कि सभी कर्मचारियों को इसकी गंभीरता का पूरा अहसास हो। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस नीति का पालन न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस आदेश का उद्देश्य न केवल प्रशासनिक सुधार करना है बल्कि राज्य में नशे की रोकथाम और कानून के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करना भी है। मुख्यमंत्री सुखू की पहल से हिमाचल प्रदेश अब नशे के मामलों में शून्य सहिष्णुता नीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
इस नई नीति के तहत अब सरकारी कर्मचारियों के लिए यह साफ संदेश है कि चिट्टा तस्करी और गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की भागीदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे तुरंत और बिना किसी लंबी जांच के बर्खास्त कर दिया जाएगा। यह आदेश राज्य के सभी सरकारी विभागों में लागू है और इसका पालन करना अनिवार्य है।
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