Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने युवाओं, विशेषकर नवोदित वैज्ञानिकों से आह्वान किया है कि वे ऐसे अनुसंधान कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें, जिनसे सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक सोच और नवाचार ही कृषि क्षेत्र को सशक्त बना सकते हैं, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इस दौरान उन्होंने छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया।
राज्यपाल ने यह विचार सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के 17वें दीक्षांत समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने सभी स्नातक छात्रों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई दी और इसे उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह वह समय है, जब विद्यार्थी शैक्षणिक ज्ञान से आगे बढ़कर उसे व्यवहारिक जीवन में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। साथ ही उन्होंने छात्रों को समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को हमेशा ध्यान में रखने की सलाह दी।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान से निकले विद्यार्थी देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपलब्धियों के माध्यम से आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी कृषि और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है, जबकि लगभग 62 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का लगभग 9.4 प्रतिशत योगदान है, जो इस क्षेत्र की महत्ता को दर्शाता है। ऐसे में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान अनुसंधान, नवाचार और दूरदर्शी नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण विकास, सामाजिक प्रगति और राष्ट्र निर्माण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी सराहा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान भविष्य में भी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ सीधे खेतों तक पहुंचना चाहिए। जब तक शोध के परिणाम किसानों तक नहीं पहुंचेंगे, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए जरूरी है कि वैज्ञानिक और शोधकर्ता किसानों के साथ मिलकर काम करें और उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजें।
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