सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर के खिलाफ एफआईआर की मांग ठुकराई, मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर के खिलाफ एफआईआर की मांग ठुकराई, मिली बड़ी राहत

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

May 1, 2026 3:52 p.m. 115

हमीरपुर से जुड़े एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। देशद्रोहियों को लेकर दिए गए उनके एक बयान पर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट प्रदान की है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और इसे न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

इस संबंध में जिला भाजपा प्रवक्ता विनोद ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि अनुराग ठाकुर के खिलाफ दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर ने जो बयान दिया था, वह देश के खिलाफ काम करने वाली सोच के विरोध में था और उसका उद्देश्य राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने अनावश्यक विवाद खड़ा किया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे, ने 30 अप्रैल 2026 को इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया। यह याचिका एक राजनीतिक नेता की ओर से दायर की गई थी, जिसमें अनुराग ठाकुर और एक अन्य नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। अदालत ने सभी तथ्यों को देखते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया और राहत प्रदान की।

भाजपा प्रवक्ता ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं होता, जबकि भाजपा हमेशा से न्यायालय के निर्णयों का सम्मान करती आई है।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुराग ठाकुर ने हमेशा देशहित में अपनी बात रखी है और राष्ट्र की एकता व अखंडता को सर्वोपरि माना है। अगर कोई देश के खिलाफ गलत सोच रखता है या देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है। इस संदर्भ में उनका बयान भी इसी भावना से प्रेरित था।

इस फैसले के बाद समर्थकों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक स्तर पर इसकी चर्चा लगातार जारी है। यह निर्णय न केवल एक व्यक्ति विशेष के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही अपना फैसला सुनाती है।

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