कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर को गेहूं अनुसंधान परियोजना में बड़ी सफलता
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर को गेहूं अनुसंधान परियोजना में बड़ी सफलता

Post by : Himachal Bureau

May 23, 2026 4:44 p.m. 772

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर को कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के नेशनल एग्रीकल्चरल साइंस फंड के अंतर्गत ₹100.15 लाख की एक महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना गेहूं की फसल में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

इस परियोजना में कृषि विश्वविद्यालय को प्रमुख संस्थान के रूप में चयनित किया गया है, जबकि देश के कई प्रमुख शोध संस्थान इसके साझेदार होंगे। इनमें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना, नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, नई दिल्ली तथा विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, उत्तराखंड शामिल हैं। यह परियोजना तीन वर्षों तक चलेगी और इसका मुख्य लक्ष्य गेहूं की उन्नत और रोग प्रतिरोधी किस्मों का विकास करना है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह न केवल विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता को दर्शाती है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कृषि विज्ञान में इसकी मजबूत उपस्थिति को भी प्रमाणित करती है। उन्होंने शोध टीम, विशेष रूप से डॉ. विजय राणा के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने इस परियोजना को सफलतापूर्वक विश्वविद्यालय तक पहुंचाया।

वनस्पति प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभागाध्यक्ष प्रो. जय देव ने बताया कि इस परियोजना में जंगली प्रजातियों, पारंपरिक देशी नस्लों और ट्रिटिकेल-गेहूं संकर जैसे विविध आनुवंशिक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। इन संसाधनों में छिपी विशेषताओं की पहचान कर उन्हें आधुनिक गेहूं किस्मों में शामिल किया जाएगा, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

प्रधान अन्वेषक डॉ. विजय राणा ने बताया कि इस शोध में खेत आधारित मूल्यांकन, उन्नत प्रजनन तकनीकों का उपयोग और नई किस्मों की उपज व गुणवत्ता का परीक्षण शामिल होगा। इसके अलावा पाउडरी मिल्ड्यू और पीली रतुआ जैसी गंभीर बीमारियों पर भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

इस परियोजना से रोग प्रतिरोधी गेहूं किस्मों के विकास, आनुवंशिक विविधता बढ़ाने और तेज प्रजनन तकनीकों के उपयोग में मदद मिलेगी। यह पहल न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगी बल्कि बदलते मौसम और नई बीमारियों के खतरे से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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