Author : Rajesh Vyas
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के सभागार में 8 मई 2026 को 17वां भव्य दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह अवसर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और अभिभावकों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली।
इस समारोह में हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने समारोह की अध्यक्षता करते हुए मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि डिग्री प्राप्त करना केवल एक पड़ाव है, असली सफलता तब है जब अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए किया जाए।
राज्यपाल ने विशेष रूप से कहा कि कृषि और बागवानी हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, क्योंकि राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्रों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान को केवल अकादमिक सीमाओं तक न रखें, बल्कि उसे खेतों और किसानों तक पहुंचाकर वास्तविक परिवर्तन लाएं।
उन्होंने आधुनिक कृषि की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शोध आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने रासायनिक खेती के विकल्प विकसित करने और सुरक्षित, पौष्टिक एवं टिकाऊ खाद्य उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। राज्यपाल ने यह भी कहा कि युवा वैज्ञानिक और स्नातक आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त आधार बन सकते हैं।
इस अवसर पर कुल 340 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं तथा 18 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इन विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. ए.के. पांडा ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं एएसआरबी अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
समारोह में कृषि सचिव सी. पलरासु, कुलसचिव मधु चौधरी, कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र जसरोटिया, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, शिक्षक, छात्र और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जो सभी के लिए एक प्रेरणादायक और स्मरणीय अनुभव बन गया।
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