Author : Prem Sagar
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, बादल फटना और भारी बारिश बार-बार आती रहती हैं। इससे लोगों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। इस कठिन परिस्थिति के बीच केंद्रीय विद्यालय एनएचपीसी सैंज के कक्षा दसवीं के छात्र कार्तिक ठाकुर ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचारी दृष्टि से लोगों के लिए आशा की नई किरण जगा दी है।
कार्तिक ठाकुर ने पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और इसके कारण होने वाली जन-धन हानि को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा यंत्र विकसित किया है, जो संभावित प्राकृतिक आपदाओं का पूर्व चेतावनी संकेत देकर लोगों को समय रहते सतर्क कर सकता है। उनका यह नवाचारी यंत्र भविष्य में कई जानें बचाने में मददगार साबित हो सकता है।
कार्तिक की इस दूरदर्शी और समाजोपयोगी वैज्ञानिक सोच को केंद्रीय विद्यालय संगठन, गुरुग्राम संभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। यह प्रतियोगिता केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 अंबाला छावनी में आयोजित हुई, जिसमें लगभग 60 विद्यालयों के सैकड़ों छात्र भाग लेने आए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी थीम के अंतर्गत कार्तिक ठाकुर ने अपने प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रथम स्थान प्राप्त किया।

इस उपलब्धि के साथ ही कार्तिक अब राष्ट्रीय स्तर की बाल वैज्ञानिक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मुंबई (महाराष्ट्र) जाएंगे।
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती विनीता परशीरा ने कार्तिक ठाकुर को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की ऐसी नवाचारी सोच समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने में एक सशक्त कदम है। विद्यालय में ATL प्रयोगशाला के माध्यम से बच्चों की वैज्ञानिक सोच को व्यवहार में उतारने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने कार्तिक के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वह राष्ट्रीय मंच पर भी विद्यालय, क्षेत्र और संभाग का नाम रोशन करेंगे।
कार्तिक की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर पूरे विद्यालय परिवार और उनके परिजनों ने गर्व और खुशी व्यक्त की। केंद्रीय विद्यालय एनएचपीसी सैंज परिवार ने कार्तिक को ढेरों शुभकामनाएँ और आशीर्वाद दिए, ताकि उनका यह प्रयास भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का मजबूत आधार बन सके।
यह उल्लेखनीय है कि कार्तिक सैंज घाटी के मातला गाँव के निवासी हैं, जिसका घर पहले ही प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ चुका है। उनके इस प्रोजेक्ट की वीडियो पहले ही विद्यालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो चुकी है, जिसे 5 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। कार्तिक ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों, माता-पिता और अपने बाल वैज्ञानिक साथी सृजन आर्य को दिया।
कार्तिक का यह प्रोजेक्ट न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह युवा वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए प्रेरणा का एक उदाहरण भी बन गया है। उनका यह कदम यह दर्शाता है कि छोटे प्रयास भी समाज और लोगों की सुरक्षा में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
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