Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने भूकंपीय खतरों के सटीक आकलन और आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना शुरू की है। ‘भारत में भूकंपीय खतरे का आकलन और लचीलापन सुदृढ़ करना’ विषय पर आधारित यह विशेष प्रोजेक्ट वर्ष 2030 तक चलेगा। इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूनाइटेड किंगडम की ‘नेचुरल एनवायरनमेंट रिसर्च काउंसिल’ द्वारा संयुक्त रूप से बजट उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस उच्च स्तरीय शोध समूह में विश्व प्रसिद्ध कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, एस्टन बिजनेस स्कूल, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, आईआईएसईआर कोलकाता और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. दीपक पंत इस परियोजना के सामाजिक विज्ञान घटक का नेतृत्व कर रहे हैं। वे ब्रिटेन के एस्टन बिजनेस स्कूल के डॉ. कोमल राज आर्याल के साथ मिलकर सक्रिय फॉल्ट लाइनों की पहचान करने पर कार्य कर रहे हैं, जिनसे भविष्य में भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। इसके लिए हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक भूकंप मापन यंत्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
शोध का एक प्रमुख हिस्सा इस बात पर भी केंद्रित है कि स्थानीय समुदाय भूकंप के जोखिमों को किस प्रकार समझते हैं और आपदा के समय प्रभावी तैयारियों में उन्हें किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वर्ष 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप जैसी ऐतिहासिक त्रासदियों से सीख लेते हुए, यह पहल स्थानीय लोगों और समुदायों को भविष्य के भू-जलवायु संबंधी खतरों के प्रति अधिक जागरूक और तैयार करेगी।
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