Post by : Khushi Joshi
कुल्लू जिले की बहुचर्चित बिजली महादेव रोपवे परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। परियोजना निर्माण में पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस परियोजना से जुड़े हर जिम्मेदार पक्ष को कानून के अनुसार जवाब देना अनिवार्य है, और पर्यावरण से जुड़े किसी भी प्रकार के लापरवाह व्यवहार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस मामले से संबंधित दो मूल आवेदन—नचिकेता शर्मा बनाम भारत संघ एवं बिजली महादेव मंदिर समिति बनाम भारत संघ—पर समान पर्यावरणीय मुद्दे पाए गए, जिसके बाद दोनों को एक साथ निपटाने का निर्णय लिया गया। आवेदकों की ओर से यह गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि रोपवे के निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मंजूरियों और अनिवार्य दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि वृक्षों की कटाई में अनियमितताएं हुई हैं और निर्माण ने स्थानीय जंगलों तथा संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाया है।
सुनवाई में यह भी उल्लेख किया गया कि परियोजना का वास्तविक क्रियान्वयन रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट लिमिटेड, उदयपुर द्वारा किया जा रहा है। इस आधार पर आवेदकों की कानूनी टीम ने मांग की कि संबंधित कंपनी को भी इस केस में आवश्यक पक्षकार बनाया जाए, ताकि वह अपने हिस्से की जिम्मेदारी से बच न सके। ट्रिब्यूनल ने इस बिंदु पर भी गंभीरता से विचार किया और सभी संबंधित एजेंसियों को विस्तृत उत्तर दाखिल करने के निर्देश दिए।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में इस फैसले के बाद उम्मीद जगी है कि परियोजना के कारण यदि किसी प्रकार का पर्यावरणीय नुकसान हुआ है, तो उसकी स्पष्ट जांच होगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी संभव होगी। बिजली महादेव रोपवे को कुल्लू के पर्यटन विकास का एक बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, लेकिन इसके निर्माण काल से ही पर्यावरणीय मानकों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं को अत्यधिक सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यदि नियमों का पालन नहीं होता, तो भविष्य में बड़े हादसों और प्राकृतिक असंतुलन का खतरा बढ़ सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें सभी पक्षों को अपने-अपने जवाब प्रस्तुत करने होंगे। ट्रिब्यूनल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और किसी भी तरह की कोताही का परिणाम सीधे कानूनी कार्रवाई के रूप में सामने आ सकता है।
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