कांगड़ा में बनेगा वर्ल्ड क्लास चिड़ियाघर, दिसंबर से आएंगे वन्यजीव
कांगड़ा में बनेगा वर्ल्ड क्लास चिड़ियाघर, दिसंबर से आएंगे वन्यजीव

Post by : Himachal Bureau

March 10, 2026 12:32 p.m. 150

हिमाचल प्रदेश सरकार की कांगड़ा जिले को प्रदेश की 'पर्यटन राजधानी' के रूप में स्थापित करने की महत्त्वाकांक्षी योजना अब वास्तविक स्वरूप लेने लगी है। देहरा विधानसभा क्षेत्र के बनखंडी में विकसित किया जा रहा अत्याधुनिक 'दुर्गश अरण्य प्राणी उद्यान' अपने निर्माण के प्रथम चरण के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका है।

वन्यजीव विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि यदि निर्माण और तकनीकी व्यवस्थाएं इसी गति से चलती रहीं, तो इस वर्ष दिसंबर माह तक उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों, दुर्लभ पशुओं और विदेशी पक्षियों को लाने का विधिवत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह परियोजना न केवल जिला कांगड़ा के लिए मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि संपूर्ण हिमाचल प्रदेश के पर्यटन प्रोफाइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और सशक्त पहचान दिलाएगी।

इस प्राणी उद्यान की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका वैज्ञानिक प्रबंधन और वन्यजीवों की विविधता है। योजना के ब्लूप्रिंट के अनुसार, यहाँ 80 प्रतिशत भारतीय प्रजातियों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि शेष 20 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मूल के दुर्लभ वन्यजीवों के लिए आरक्षित किया गया है। चिड़ियाघर प्रशासन इसके लिए देश के विभिन्न प्रतिष्ठित जूलॉजिकल पार्क्स और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संगठनों के निरंतर संपर्क में है।

जानकारी के अनुसार, यहाँ 'बिग कैट' प्रजाति के जानवरों, विशेषकर एशियाई शेरों को लाने की विशेष योजना है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके अतिरिक्त, उद्यान में शाकाहारी जीवों,  सरीसृप और निशाचर जीवों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विशेष प्राकृतिक आवास और बाड़े तैयार किए जा रहे हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए विख्यात कांगड़ा जिला, इस 'दुर्गश अरण्य प्राणी उद्यान' के माध्यम से अब वाइल्डलाइफ टूरिज्म के वैश्विक मानचित्र पर भी मजबूती से उभरेगा। प्रदेश सरकार का मानना है कि इस चिड़ियाघर के पूर्ण होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे और देहरा क्षेत्र की आर्थिकी को जबरदस्त गति मिलेगी।
 
बनखंडी के प्राकृतिक परिवेश में तैयार हो रहा यह पार्क पर्यावरण शिक्षा और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी एक शोध केंद्र की भूमिका निभाएगा। प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक धरोहर और अब इस अत्याधुनिक प्राणी उद्यान का संगम कांगड़ा को दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक अनिवार्य गंतव्य बना देगा।

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