लाहौल में मूलिंग पुल के पास भारी भूस्खलन, मनाली-लेह हाईवे बंद
लाहौल में मूलिंग पुल के पास भारी भूस्खलन, मनाली-लेह हाईवे बंद

Post by : Khushi Joshi

Nov. 17, 2025 12:21 p.m. 4170

हिमाचल प्रदेश की ऊंची पहाड़ियों में मौसम और भूगर्भीय बदलाव एक बार फिर बड़ा खतरा बनकर सामने आए हैं। लाहौल घाटी में मूलिंग पुल के समीप सोमवार सुबह हुए भूस्खलन ने मनाली–लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। सुबह करीब नौ बजे हुई इस घटना ने न केवल यातायात को रोक दिया, बल्कि सैकड़ों स्थानीय लोगों और यात्रियों को अचानक संकट की स्थिति में डाल दिया। पहाड़ी का विशाल हिस्सा टूटकर सड़क पर गिरा और देखते ही देखते पूरी लेन मलबे से पट गई, जिससे आगे-पीछे जा रहे वाहन वहीं फँस गए।

मनाली–लेह हाईवे हिमाचल और लद्दाख के बीच जीवनरेखा माना जाता है। पर्यटकों, स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और सेना के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस हाईवे के अवरुद्ध होते ही सुबह से केलॉन्ग के आसपास लंबी कतारों में फंसे वाहनों के इंजन बंद होने लगे और यात्रियों के बीच चिंता बढ़ती चली गई। कई लोग जो मनाली से बारालाचा ला, सरचू, पांग या आगे लेह की तरफ जा रहे थे, वे अचानक रास्ता बंद होने से वहीं रुक गए और उन्हें सर्द हवा के बीच सुरक्षित रास्ते की उम्मीद में इंतजार करते रहना पड़ा।

भूस्खलन के तुरंत बाद प्रशासन और पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया और यात्रियों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी। कुछ वाहनों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग यात्री भी थे, जिनकी सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोग और प्रशासनिक टीमें लगातार संपर्क में बनी हुई हैं। मलबे की मात्रा इतनी अधिक है कि सड़क साफ करने में आमतौर पर लगने वाले समय से अधिक मेहनत और संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अपनी टीमें भेज दीं। भारी मशीनरी, जेसीबी, एक्स्कावेटर और डंपर तुरंत मौके पर लगाकर मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। लेकिन अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन का दायरा बहुत बड़ा है और चट्टानों का आकार सामान्य से अधिक भारी है, इसलिए यातायात बहाल करने में समय लग सकता है। बीआरओ के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में केवल एक लेन खोलकर फंसे हुए वाहनों को निकाला जाएगा, उसके बाद सड़क को पूरी तरह साफ किया जाएगा।

लाहौल में इस समय तापमान लगातार नीचे जा रहा है और रात के समय ठंड काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में हाईवे के बंद होने के कारण यात्रियों को असुविधा के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन ने आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सहायता प्रदान करें और किसी भी अफवाह से बचें। वहीं, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी घटनास्थल पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लगातार अपडेट जारी कर रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में मनाली–लेह हाईवे पर भूस्खलन और भूगर्भीय गतिविधियों की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बार-बार का तापमान उतार-चढ़ाव, बर्फ के पिघलने की गति में बदलाव और पहाड़ियों की संरचना में कमजोरी इन घटनाओं का बड़ा कारण है। हाईवे की ऊँचाई और भौगोलिक बनावट इसे संवेदनशील बनाती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि मूलिंग क्षेत्र में पहले भी दरारें दिखाई दी थीं, लेकिन इस बार पहाड़ी का इतना बड़ा हिस्सा एक साथ गिरने से हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं।

हालाँकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन रास्ता बंद होने से हजारों की यात्रा बाधित हो चुकी है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना आवश्यक अपडेट के इस मार्ग पर यात्रा न करें और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने पर उसका उपयोग करें।

बीआरओ लगातार काम में लगा हुआ है और उम्मीद जताई जा रही है कि दिन के अंत तक कम से कम एकतरफा आवाजाही बहाल हो सकती है। फिलहाल पूरा क्षेत्र सतर्कता और धैर्य के माहौल में है, जबकि मशीनें बर्फीले मौसम और कठिन भू-भाग से लड़ते हुए सड़क को खोलने की कोशिश में जुटी हैं।

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