हिमाचली शादी की अनोखी रस्में बनीं आकर्षण का केंद्र, जानिए हर रिवाज़ का महत्व
हिमाचली शादी की अनोखी रस्में बनीं आकर्षण का केंद्र, जानिए हर रिवाज़ का महत्व

Post by : Shivani Kumari

Oct. 6, 2025 5:51 p.m. 1278

हिमाचली शादी की रस्में: परंपरा और संस्कृति की झलक

हिमाचल प्रदेश की शादियाँ केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का संगम होती हैं। यहाँ की शादी की रस्में सदियों पुरानी परंपराओं पर आधारित हैं, जिनमें धार्मिक आस्था, लोक संगीत, नृत्य और सामूहिकता का सुंदर मेल देखने को मिलता है। हर क्षेत्र — चाहे वह कांगड़ा हो, कुल्लू, मंडी या किन्नौर — अपनी अनोखी शादी की परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस लेख में हिमाचली शादी की प्रमुख रस्मों, उनके अर्थ और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझाया गया है।

हिमाचली शादी की प्रमुख विशेषताएँ

  • देवी-देवताओं की पूजा से शुरुआत।
  • लोक गीतों और नाटी नृत्य का समावेश।
  • सामूहिक भोज और पारंपरिक व्यंजन।
  • सादगी और धार्मिकता का संगम।

शादी से पहले की रस्में

1. रिश्ता तय होना (रोका या ठहराव)

हिमाचल में शादी की शुरुआत रिश्ता तय होने से होती है। दोनों परिवार पंडित की सलाह से शुभ मुहूर्त निकालते हैं। इस अवसर पर मिठाई और उपहारों का आदान-प्रदान होता है।

2. सगाई (थोड़ा या शगुन)

सगाई समारोह में वर और वधू के परिवार एक-दूसरे को अंगूठी, कपड़े और मिठाई देते हैं। यह रिश्ता पक्का होने का प्रतीक है।

3. देवता की अनुमति (देव पूजन)

हिमाचल में हर शुभ कार्य से पहले स्थानीय देवता की पूजा की जाती है। शादी से पहले देवता से अनुमति ली जाती है ताकि विवाह मंगलमय हो।

शादी के दिन की रस्में

1. बारात की तैयारी

शादी के दिन वर पक्ष के घर में बारात की तैयारी होती है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए बाराती निकलते हैं। पुरुष पारंपरिक पगड़ी और महिलाएँ रंगीन पट्टू पहनती हैं।

2. बारात का स्वागत

वधू पक्ष बारात का स्वागत फूलों, आरती और लोक गीतों से करता है। यह स्वागत “धाम” भोज के साथ होता है जिसमें पारंपरिक व्यंजन जैसे मद्रा, सिद्दू और मीठा भात परोसे जाते हैं।

3. वरमाला (मालादान)

वर और वधू एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाते हैं। यह एक-दूसरे को स्वीकार करने का प्रतीक है।

4. फेरे (सप्तपदी)

हिमाचली शादी में फेरे अग्नि के चारों ओर लिए जाते हैं। पंडित मंत्रों के साथ सात वचन दिलवाते हैं जो जीवनभर के बंधन का प्रतीक हैं।

5. कन्यादान

कन्यादान सबसे पवित्र रस्म मानी जाती है। वधू के माता-पिता अपनी बेटी को वर को सौंपते हैं। यह भावनात्मक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

6. मांग भरना और सिंदूरदान

फेरों के बाद वर वधू की मांग में सिंदूर भरता है और मंगलसूत्र पहनाता है। यह विवाह की पूर्णता का प्रतीक है।

शादी के बाद की रस्में

1. विदाई

विदाई के समय वधू अपने परिवार से विदा लेकर ससुराल जाती है। यह भावनात्मक क्षण होता है जिसमें लोक गीत गाए जाते हैं।

2. गृह प्रवेश

ससुराल पहुँचने पर वधू का स्वागत आरती और दीपक से किया जाता है। उसे घर की देवी के मंदिर में पूजा के लिए ले जाया जाता है।

3. देवता को धन्यवाद (देव पूजन)

शादी के बाद देवता को धन्यवाद दिया जाता है कि विवाह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

4. धाम भोज

शादी के बाद पूरे गाँव को भोज दिया जाता है जिसे “धाम” कहा जाता है। इसमें पारंपरिक व्यंजन जैसे मद्रा, चना, मीठा भात और दही परोसे जाते हैं।

हिमाचली शादी में पहनावा

  • वधू का परिधान: पट्टू, चोली, दुपट्टा और चांदी के आभूषण।
  • वर का परिधान: चूड़ीदार पायजामा, अचकन और हिमाचली पगड़ी।
  • आभूषण: चांदी की चूड़ियाँ, नथ, हार और कंठा।

हिमाचली शादी में संगीत और नृत्य

शादी के अवसर पर लोक गीत और नाटी नृत्य का विशेष महत्व होता है। महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं और पुरुष ढोल-नगाड़े बजाते हैं।

लोक गीतों के प्रकार:

  • सुआ गीत – वधू की विदाई के समय।
  • बारात गीत – बारात के स्वागत के समय।
  • देव गीत – देवता की पूजा के समय।

हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों की शादी की विशेषताएँ

कांगड़ा

कांगड़ा में शादी में देवी-देवताओं की पूजा और लोक गीतों का विशेष महत्व होता है।

कुल्लू

कुल्लू में देवता की अनुमति के बिना शादी नहीं होती। यहाँ नाटी नृत्य शादी का मुख्य आकर्षण है।

किन्नौर

किन्नौर में बहुपतित्व की परंपरा पहले प्रचलित थी। यहाँ की शादी में बौद्ध और हिंदू दोनों परंपराओं का मिश्रण देखने को मिलता है।

चंबा

चंबा की शादियाँ रंगीन परिधानों और लोक संगीत के लिए प्रसिद्ध हैं।

FAQs – हिमाचली शादी की रस्में

प्रश्न 1: हिमाचली शादी कितने दिन चलती है?

आमतौर पर हिमाचली शादी 3 से 5 दिन तक चलती है।

प्रश्न 2: क्या हिमाचली शादी में देवता की पूजा जरूरी है?

हाँ, हर शादी से पहले देवता की अनुमति ली जाती है।

प्रश्न 3: हिमाचली शादी में कौन-कौन से व्यंजन परोसे जाते हैं?

मद्रा, सिद्दू, मीठा भात, चना और दही प्रमुख व्यंजन हैं।

प्रश्न 4: क्या हिमाचली शादी में नाटी नृत्य होता है?

हाँ, नाटी नृत्य हर शादी का अभिन्न हिस्सा है।

प्रश्न 5: क्या हिमाचली शादी में आधुनिक रीति-रिवाज़ शामिल हो गए हैं?

हाँ, अब पारंपरिक रस्मों के साथ आधुनिक तत्व जैसे फोटोग्राफी और डीजे भी शामिल हो गए हैं।

प्रश्न 6: क्या हिमाचली शादी में दहेज प्रथा होती है?

नहीं, अधिकांश हिमाचली समाजों में दहेज प्रथा नहीं होती।

हिमाचली शादी की रस्में केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव हैं। इनमें धार्मिकता, संगीत, नृत्य और सामूहिकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है। हर रस्म का अपना अर्थ और महत्व है जो हिमाचल की संस्कृति को जीवित रखता है। आधुनिकता के बावजूद हिमाचली लोग अपनी परंपराओं को गर्व से निभाते हैं, जिससे यह संस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहती है।

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