Post by : Shivani Kumari
हिमाचल प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित एक सुंदर पहाड़ी राज्य है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन आज जिस हिमाचल को हम जानते हैं, वह कई ऐतिहासिक घटनाओं और राजनैतिक परिवर्तनों का परिणाम है। आइए जानते हैं हिमाचल प्रदेश का पूरा इतिहास और यह कैसे एक अलग राज्य बना।
हिमाचल प्रदेश का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा है। यह क्षेत्र देवभूमि यानी देवताओं की भूमि कहलाता है। यहाँ कई छोटी-छोटी रियासतें थीं, जैसे – कांगड़ा, चंबा, मंडी, सिरमौर, बिलासपुर, सोलन और कीनौर। इन रियासतों में स्थानीय राजाओं का शासन था, जिन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजा।
1815 में गोरखा युद्ध के बाद ब्रिटिशों ने हिमालयी क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अधिकार किया। इस दौरान शिमला ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी (Summer Capital) बना। यहीं से हिमाचल का नाम देशभर में प्रसिद्ध हुआ और आधुनिक प्रशासनिक ढांचा बनने लगा।
1947 में भारत की आज़ादी के बाद हिमाचल की कई रियासतों का भारत में विलय हुआ। इसके बाद शुरू हुआ हिमाचल प्रदेश के निर्माण का सफर।
हिमाचल प्रदेश के गठन से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ 15 अप्रैल 1948 – 30 रियासतों को मिलाकर मुख्य आयुक्त प्रदेश हिमाचल की स्थापना की गई। यही दिन अब हिमाचल दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1951 – हिमाचल प्रदेश को भारत का संघ शासित प्रदेश घोषित किया गया। 1954 – बिलासपुर रियासत को हिमाचल प्रदेश में शामिल किया गया। 1966 – पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर आदि क्षेत्र हिमाचल में जोड़े गए। 25 जनवरी 1971 – हिमाचल प्रदेश को भारत का 18वां पूर्ण राज्य घोषित किया गया।हिमाचल को “देवभूमि” कहा जाता है क्योंकि यहाँ अनेक देव मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। यहाँ की संस्कृति में गद्दी, पहाड़ी, किन्नौरी, लाहौली और कुल्लूवी परंपराएँ शामिल हैं। बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी, पहाड़ी, मंडियाली और किन्नौरी प्रमुख हैं।
हिमाचल प्रदेश का इतिहास यह दर्शाता है कि यह राज्य सांस्कृतिक विविधता, संघर्ष और एकता का प्रतीक है। छोटी रियासतों से लेकर आधुनिक राज्य बनने तक का यह सफर गर्व का विषय है। हिमाचल आज अपनी पहचान, शांति और विकास के लिए जाना जाता है।
यह लेख केवल जानकारी और जनजागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी त्रुटि या सुझाव के लिए कृपया Jan Himachal संपादकीय टीम से संपर्क करें।
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