मूसलाधार बारिश में भी नहीं डिगी आस्था, 200 श्रद्धालुओं ने की पदयात्रा
मूसलाधार बारिश में भी नहीं डिगी आस्था, 200 श्रद्धालुओं ने की पदयात्रा

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

July 20, 2026 1:41 p.m. 138

सावन माह के पहले रविवार को हमीरपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। भारी वर्षा के बावजूद लगभग 200 श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास का परिचय देते हुए प्राचीन धार्मिक स्थलों की पदयात्रा पूरी की। पूरे मार्ग में "हर-हर महादेव" के जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा भावना और सनातन परंपराओं के प्रति लोगों की गहरी निष्ठा का भी संदेश देती नजर आई।

गांधी चौक से गणेश वंदना के साथ हुआ शुभारंभ

रविवार तड़के सुबह लगभग पांच बजे गांधी चौक से यात्रा का शुभारंभ विधिवत गणेश आरती के साथ किया गया। यात्रा शुरू होने से पहले सभी श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश का स्मरण कर मंगलमय यात्रा की कामना की। यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। मौसम लगातार खराब होने के बावजूद किसी के उत्साह में कमी दिखाई नहीं दी। श्रद्धालु बारिश में भी भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। सावन के पवित्र महीने में आयोजित इस Sawan 2026 यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।

सबसे पहले किए भगवान भोलेनाथ के दर्शन

श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव जसकोट स्थित प्राचीन भोलेनाथ मंदिर रहा। यहां पहुंचकर सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और दर्शन किए। दर्शन के उपरांत मंदिर परिसर में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया। सावन के महीने में Lord Shiva की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है और इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हुए।

झनियारी माता मंदिर में लिया आशीर्वाद

भोलेनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा आगे बढ़ी और झनियारी माता मंदिर पहुंची। यहां सभी श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर परिवार की खुशहाली और प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की। माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन का क्रम लगातार जारी रहा, जिससे यात्रा का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा।

बाबा बालक नाथ मंदिर सासन पहुंची यात्रा

इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था बाबा बालक नाथ मंदिर सासन पहुंचा। इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल के दौरान पांडव इस स्थान पर रुके थे और उन्होंने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर की एक विशेष परंपरा भी है, जिसके अनुसार महिलाएं ऊपर स्थित गुफा में दर्शन के लिए नहीं जाती हैं। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर बाबा बालक नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह Shiv Temple क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल माना जाता है।

भव्य लंगर में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और स्थानीय सहयोगियों के सहयोग से विशाल लंगर का आयोजन किया गया। यात्रा में शामिल सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और सेवा भावना का परिचय दिया। लंगर के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते दिखाई दिए। इससे सामाजिक समरसता, भाईचारे और सेवा की भावना का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभालने, श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सावन के प्रत्येक रविवार होगी धार्मिक यात्रा

यात्रा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सावन माह के प्रत्येक रविवार को इसी प्रकार हमीरपुर से विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए पदयात्रा निकाली जाएगी। समिति का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को धार्मिक स्थलों से जोड़ना, युवा पीढ़ी में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक आयोजन निरंतर जारी रहेंगे ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़ी रहे।

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श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों का किया गया सम्मान

यात्रा के सफल आयोजन के बाद समिति ने सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के बावजूद जिस प्रकार लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, वह उनकी अटूट आस्था और धार्मिक विश्वास का प्रमाण है। अंत में भगवान भोलेनाथ से सभी श्रद्धालुओं के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और प्रदेश में खुशहाली की कामना की गई। पूरे आयोजन का समापन शांतिपूर्ण एवं भक्तिमय वातावरण में हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि सच्ची आस्था किसी भी परिस्थिति में अपने मार्ग से नहीं डिगती।

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