स्थायी कुलपति और कुलसचिव के बिना कृषि विश्वविद्यालय की व्यवस्था चरमराई: गोकुल कुमार
स्थायी कुलपति और कुलसचिव के बिना कृषि विश्वविद्यालय की व्यवस्था चरमराई: गोकुल कुमार

Author : Rajesh Vyas

July 20, 2026 6:10 p.m. 195

एग्रीविजन प्रांत संयोजक गोकुल कुमार ने चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का प्रमुख कृषि शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान लंबे समय से स्थायी नेतृत्व के अभाव में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति और कुलसचिव की नियुक्ति न होने से कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित पड़े हैं, जिसका सीधा असर संस्थान की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे रहा है। गोकुल कुमार ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन के लिए मजबूत और स्थायी नेतृत्व आवश्यक होता है। यदि शीर्ष स्तर पर नियमित नियुक्तियां नहीं होंगी तो प्रशासनिक निर्णयों में देरी होना स्वाभाविक है, जिससे शिक्षण, अनुसंधान और विकास से जुड़े कार्य प्रभावित होते हैं।

प्रवेश प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा असर

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के शैक्षणिक सत्र के लिए अब तक विश्वविद्यालय का प्रॉस्पेक्टस अंतिम रूप में जारी नहीं हो सका है। इसके कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों को यह स्पष्ट जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही कि किस पाठ्यक्रम में प्रवेश कब और किस प्रक्रिया के तहत होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण फाइलें और निर्णय लंबित हैं, जिससे विश्वविद्यालय की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थायी नेतृत्व की नियुक्ति नहीं की गई तो इसका असर आने वाले शैक्षणिक सत्रों पर भी पड़ सकता है।

स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक नहीं होने पर जताई चिंता

गोकुल कुमार ने विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक चिकित्सा सुविधा का मुख्य माध्यम है, लेकिन लंबे समय से यहां स्थायी चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होना गंभीर विषय है और इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारु रूप से संचालित होना भी किसी विश्वविद्यालय की मूलभूत आवश्यकता है।

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रिक्त पदों को भरने की उठाई मांग

गोकुल कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में शिक्षकों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अनेक पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन पदों के खाली रहने से शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान कार्यों और किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने वाली प्रसार सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।

उन्होंने प्रदेश सरकार और कुलाधिपति से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र स्थायी कुलपति, कुलसचिव और चिकित्सक की नियुक्ति की जाए। साथ ही रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरकर प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जाए, ताकि प्रदेश के इस महत्वपूर्ण कृषि संस्थान की कार्यप्रणाली फिर से सुचारु रूप से संचालित हो सके।

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