Post by : Khushi Joshi
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा सुधारों की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए हमीरपुर को समर्पित विज्ञान महाविद्यालय प्रदान कर दिया है। लंबे समय से इस जिले में एक ऐसे संस्थान की मांग उठ रही थी, जहाँ विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षा व शोध सुविधाएँ उपलब्ध हों। अब शिक्षा विभाग की अधिसूचना जारी होने के साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने होम डिस्ट्रिक्ट से इस सुधार यात्रा की शुरुआत की है, ताकि भविष्य में प्रदेशभर में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, वर्तमान हमीरपुर डिग्री कॉलेज को एक पूर्णतः डेडिकेटेड साइंस कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ बीएससी के सभी विज्ञान विषयों के साथ-साथ बीएड का इंटीग्रेटेड कोर्स भी शुरू होगा, जिससे छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर करियर विकल्प मिलेंगे। विज्ञान विषयों से जुड़े प्रैक्टिकल लैब, वैज्ञानिक उपकरण और रिसर्च सुविधाएँ अब इसी परिसर में केंद्रित होंगी, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की कमी महसूस न हो।
दूसरी ओर, स्नातक स्तर पर पहले से चल रहे आर्ट्स, कॉमर्स और अन्य कोर्स अब इस कॉलेज से स्थानांतरित कर सीनियर सेकेंडरी स्कूल बॉयज़ हमीरपुर में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उसी स्कूल को गर्ल्स स्कूल के साथ मर्ज कर एक को-एजुकेशन मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि प्रदेश के बाकी शहरों में भी इसी मॉडल को लागू किया जाए, ताकि अलग-अलग स्कूल भवन और अधूरी संसाधनों वाली व्यवस्था की जगह एक साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो सके।
इन्हीं बदलावों के लिए अधिसूचना अकादमिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी, ताकि पूरे एक वर्ष का समय पुनर्गठन और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन के लिए उपलब्ध रहे। सरकार का इरादा है कि को-एजुकेशन के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, फैकल्टी की कमी दूर हो और छात्र-छात्राओं को समान सुविधाओं का लाभ मिले। सूत्र बताते हैं कि भविष्य में कुछ और जिलों में भी बॉयज़ और गर्ल्स स्कूलों को एकीकृत किया जा सकता है।
इसी प्रक्रिया के भाग स्वरूप, स्कूल शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी स्कूलों से फर्नीचर की नई मांग रिपोर्ट भेजने को कहा है। विभाग के अनुसार, कई विद्यालयों ने पुराने फॉर्मेट में अपूर्ण माँग पत्र भेजे थे, जिस कारण भ्रम की स्थिति बनी। अब एक नया परफॉर्मा जारी कर दिया गया है और सभी स्कूलों को GEM पोर्टल के माध्यम से खरीद प्रक्रिया अपनानी होगी। यह कदम इसलिए भी अहम है, क्योंकि को-एजुकेशन के बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से स्कूलों में कुर्सी-टेबल, लैब फर्नीचर और अन्य संसाधनों की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी।
हमीरपुर को विज्ञान शिक्षा का ऐसा समर्पित केंद्र मिलने के बाद क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह है। स्थानीय लोग इसे शिक्षा में निवेश का उत्कृष्ट उदाहरण मानते हैं। उनका मानना है कि इससे बच्चों को अब बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि आधुनिक विज्ञान शिक्षा की पढ़ाई और करियर निर्माण अपने ही जिले में हो सकेगा। सरकार का दावा है कि आने वाले कुछ वर्षों में यह संस्थान राज्य के प्रमुख विज्ञान कॉलेजों में शामिल होगा और शिक्षा के क्षेत्र में हमीरपुर को एक नई पहचान देगा।
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