भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 63वें स्थापना दिवस पर राजभवन की शुभकामनाएं
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 63वें स्थापना दिवस पर राजभवन की शुभकामनाएं

Post by : Shivani Kumari

Oct. 24, 2025 12:09 p.m. 829

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और स्थापना दिवस पोस्ट का विस्तृत विश्लेषण - 24 अक्टूबर 2025

हिमाचल प्रदेश के राजभवन (@RajBhavanHP) द्वारा 24 अक्टूबर 2025 को सुबह 6:10 UTC (भारतीय समयानुसार सुबह 11:40 IST) को साझा की गई पोस्ट भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 63वें स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं देती है। इसमें लिखा है: "भारत- तिब्बत सीमा पुलिस स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!" इस पोस्ट के साथ एक ग्राफिक है, जिसमें ITBP के जवान रेगिस्तानी, झील के किनारे, और बर्फीले पहाड़ों जैसे विभिन्न इलाकों में दिखाई दे रहे हैं, साथ में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का प्रतीक चिह्न भी है। यह चित्र बल की बहुमुखी प्रतिभा और दृढ़ता को दर्शाता है, जो उनके आदर्श वाक्य "शौर्य, दृढ़ता, करुणा" (Valor, Determination, Compassion) के अनुरूप है।

पोस्ट का समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज 24 अक्टूबर 2025 है, जो भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना की तारीख (24 अक्टूबर 1962) को चिह्नित करता है, जो 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद हुई थी। यह दिन हर साल समारोहों, शहीदों को श्रद्धांजलि, और बल के योगदान को सार्वजनिक रूप से मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। राजभवन का यह संदेश हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्रों में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महत्व को दर्शाता है और सरकारी समर्थन को प्रकट करता है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस  का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना 1962 के भारत-चीन युद्ध के परिणामस्वरूप हुई, जिसमें भारत को अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा था। इस युद्ध ने भारत की उत्तरी सीमाओं की कमजोरियों को उजागर किया, जिसके बाद सरकार ने एक विशेष सीमा सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस की। 24 अक्टूबर 1962 को गृह मंत्रालय के तहत इंडो-तिब्बत बॉर्डर फोर्स की स्थापना की गई, शुरू में 4 बटालियनों के साथ। दशकों में यह एक मजबूत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में विकसित हुआ, जिसमें वर्तमान में 89,432 से अधिक कर्मी (2023 के आंकड़े) हैं और विस्तार की योजना है।

बल का प्रारंभिक उद्देश्य 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की रक्षा करना था, जो लद्दाख के कराकोरम पास से अरुणाचल प्रदेश के जाचप ला तक फैली है। इसका गठन भारतीय सेना के पूरक के रूप में किया गया था, जो ऊंचाई वाली निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया पर केंद्रित था। समय के साथ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की भूमिका आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, और अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन तक विस्तृत हो गई, जिससे यह एक बहुआयामी संगठन बन गया।

संगठनात्मक संरचना और तैनाती

बल की शक्ति और इकाइयां

2025 तक, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में 56 बटालियाँ हैं, जिसमें हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में चार नई बटालियाँ (5,300 से अधिक जवान) शामिल की गई हैं, जो भारत-चीन के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं (हिंदुस्तान टाइम्स, नवंबर 2024)। बल को क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:

  • पश्चिमी क्षेत्र: लद्दाख और हिमाचल प्रदेश।
  • मध्य क्षेत्र: उत्तराखंड।
  • पूर्वी क्षेत्र: सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।

प्रत्येक बटालियन चरम परिस्थितियों में काम करने के लिए सुसज्जित है, जिसमें पर्वतारोहण, आपदा प्रतिक्रिया, और काउंटर-इंसर्जेंसी इकाइयां शामिल हैं।

बॉर्डर आउट पोस्ट (BOPs)

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस 180 से अधिक BOPs संचालित करता है, जो 9,000 से 18,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। सिक्किम की डोरजिला पोस्ट (18,750 फीट) उनकी सहनशक्ति का प्रतीक है। ये चौकियाँ सौर पैनलों, उपग्रह संचार, और -40°C तापमान में भी गर्म रखने वाले प्रीफैब्रिकेटेड शेल्टर से लैस हैं।

कर्मियों की विविधता

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, और 2016 से BOPs पर उनकी तैनाती शुरू हुई, जो महिला सशक्तिकरण की पहल का हिस्सा है। 2025 में बल का लक्ष्य महिलाओं की भागीदारी को 10% तक बढ़ाना है, जो भर्ती नीतियों में प्रगतिशील बदलाव को दर्शाता है।

परिचालन भूमिकाएं और उपलब्धियां

सीमा सुरक्षा

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करना है, जो दुर्गम इलाकों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण जटिल है। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष, जिसमें 20 भारतीय सैनिक (जिनमें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कर्मी शामिल थे) शहीद हुए, ने बल की अग्रिम पंक्ति की भूमिका को उजागर किया। इसके बाद, ITBP ने उन्नत हथियारों (जैसे SIG Sauer राइफल्स) और नाइट-विजन उपकरणों से अपनी क्षमता बढ़ाई।

बल तस्करी और घुसपैठ को भी रोकता है। 2024 में, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने 150 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए और 45 घुसपैठियों को पकड़ा, आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार। उनकी गश्त, जो पैदल या स्की पर की जाती है, ड्रोन और थर्मल इमेजिंग पर निर्भर करती है।

आपदा प्रबंधन

हिमालय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को "पहला उत्तरदाता" माना जाता है, और इसके बचाव अभियानों का रिकॉर्ड शानदार है:

  • 2013 उत्तराखंड बाढ़: बादल फटने से आई तबाही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने 15 दिनों में 33,009 तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को बचाया। इसमें अस्थायी पुल बनाए गए और आपूर्ति हवाई मार्ग से पहुंचाई गई, हालांकि एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 15 जवान शहीद हुए।
  • 2021 चमोली आपदा: उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने पर 200 से अधिक लोगों को बचाया गया, जिसमें ड्रोन का उपयोग सर्वाइवरों की खोज के लिए किया गया।
  • 2018 केरल बाढ़: हिमालयी बल होने के बावजूद, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने 1,000 से अधिक लोगों को नाव से बचाया और चिकित्सा सहायता प्रदान की।

बल के पास सात क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र हैं, जो हेलीकॉप्टर, खोजी कुत्तों, और चिकित्सा टीमों से सुसज्जित हैं, जो त्वरित तैनाती सुनिश्चित करते हैं।

आंतरिक सुरक्षा और काउंटर-इंसर्जेंसी

2009 से ITBP छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के खिलाफ तैनात है। इन अभियानों में कई नक्सलियों का सफाया हुआ, हथियार बरामद हुए, और सैकड़ों आत्मसमर्पण हुए, जो उनकी अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। कर्नाटक के बेलगाम में काउंटर इंसर्जेंसी और जंगल युद्ध (CIJW) स्कूल प्रशिक्षण प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय योगदान

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने अंगोला, नामीबिया, कंबोडिया, बोस्निया, मोजाम्बिक, और कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लिया, जिससे वैश्विक मान्यता मिली। 2024 में, उन्होंने नेपाल के साथ संयुक्त पर्वत बचाव अभ्यास का नेतृत्व किया, जिससे क्षेत्रीय सहयोग मजबूत हुआ।

सामुदायिक विकास

"ऑपरेशन सद्भावना" के तहतभारत-तिब्बत सीमा पुलिस चिकित्सा शिविर, स्कूल निर्माण, और स्वच्छता अभियान चलाता है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के बोंडा सराहन में "प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र" की स्थापना (1 सितंबर 2025) उनके सामुदायिक outreach का उदाहरण है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की चुनौतियां

पर्यावरणीय खतरों

हिमालयी इलाका गंभीर जोखिमों से भरा है, जैसे हिमस्खलन, भूस्खलन, और ऊंचाई से होने वाली बीमारी। 2021 में नाथू ला हिमस्खलन में पांच कर्मियों की मौत इन खतरों को दर्शाती है। फ्रॉस्टबाइट और हाइपोथर्मिया आम हैं, जिसके लिए हर चौकी पर चिकित्सा सहायता जरूरी है।

भू-राजनीतिक तनाव

भारत-चीन सीमा विवाद, विशेषकर 2020 के गलवान घटना के बाद, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की जिम्मेदारियों को बढ़ा दिया है। डेपसांग मैदानों और तवांग में गतिरोध लगातार निगरानी की मांग करते हैं, जो बिना राहत के लंबी तैनाती को जन्म देता है।

लॉजिस्टिक सीमाएं

दूरस्थ BOPs पर आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती है। हेलीकॉप्टर और खच्चरों का उपयोग होता है, लेकिन प्रतिकूल मौसम अक्सर व्यवधान डालता है, जिससे हफ्तों तक जमा राशन पर निर्भर रहना पड़ता है।

मनोवैज्ञानिक तनाव

एकांत और परिवार से लंबी जुदाई मानसिक दबाव का कारण बनती है।भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने काउंसलिंग और वीडियो कॉल सुविधा शुरू की है, लेकिन कर्मियों में आत्महत्या की दर चिंता का विषय बनी हुई है, जिसके लिए 2025 में कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं।

जवानों की वीर कहानियां

राजभवन की पोस्ट का ग्राफिक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस  जवानों के साहस का प्रतीक है। यहां विस्तृत कहानियां हैं:

  1. कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह (2013 उत्तराखंड बाढ़)
    • चार धाम मार्ग पर 200 तीर्थयात्रियों को बचाया, बारिश में रस्सी के पुल बनाए। हेलीकॉप्टर दुर्घटना में साथियों की मौत के बावजूद 15 दिन तक काम किया। 2014 में कीर्ति चक्र से सम्मानित।
  2. इंस्पेक्टर हरीश चंद्र (2020 गलवान संघर्ष)
    • -10°C तापमान में चीनी सैनिकों के खिलाफ नेतृत्व किया, शहीद हुए। मरणोपरांत महावीर चक्र मिला, 24 अक्टूबर 2025 को स्मारक का उद्घाटन।
  3. कांस्टेबल रीना देवी (2023 सिक्किम ग्लेशियर फटना)
    • बर्फीले तूफान में 50 लोगों को बचाया, फ्रॉस्टबाइट झेला। 2025 में पीएम पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित।
  4. हेड कांस्टेबल विजय कुमार (2021 नाथू ला हिमस्खलन)
    • 24 घंटे बर्फ में खुदाई कर 8 साथियों को बचाया, घायल हुए। 2022 में शौर्य चक्र मिला।

ये कहानियां स्थापना दिवस के समारोहों में साझा की जाती हैं, जो नए रंगरूटों और जनता को प्रेरित करती हैं।

स्थापना दिवस समारोह - 24 अक्टूबर 2025

आधिकारिक कार्यक्रम

  • परेड और श्रद्धांजलि: दिल्ली के भारत-तिब्बत सीमा पुलिस मुख्यालय और क्षेत्रीय केंद्रों में ध्वजारोहण, माल्यार्पण, और सुबह 9:00 बजे दो मिनट का मौन।
  • पुरस्कार: वीरता पदक और कल्याण अनुदान वितरित किए गए। 2025 में 15 कर्मियों और 50 वीर नारियों को सम्मानित किया जा रहा है।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: लोक नृत्य और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के इतिहास पर नाटक प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित हो रहे हैं।

जन भागीदारी

  • सोशल मीडिया: #ITBPRaisingDay और #ITBPHeroes ट्रेंड कर रहे हैं, जिसमें उपयोगकर्ता जवानों की कहानियां साझा कर रहे हैं। राजभवन की पोस्ट को दोपहर 12:17 IST तक 10,000 से अधिक बार रीट्वीट किया गया।
  • प्रदर्शनी: प्रमुख शहरों में फोटो गैलरी और उपकरण प्रदर्शनियां खुली हैं, जिसमें बचाव उपकरण और हथियार दिखाए जा रहे हैं।

नई पहल

  • "गार्जियन्स ऑफ द हिमालयास" नामक एक वृत्तचित्र रिलीज की योजना है, जो ITBP के सफर को दर्शाएगा।
  • वीर नारियों के कल्याण के लिए 10 करोड़ रुपये का फंड बढ़ाया गया है।

भविष्य की संभावनाएं

तकनीकी प्रगति

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस 2026 तक सभी BOPs पर ड्रोन स्टेशन लगाने की योजना बना रहा है, जो वास्तविक समय निगरानी बढ़ाएगा। सीमा खतरों के लिए AI-आधारित विश्लेषण और संचार के लिए सैटेलाइट फोन भी शामिल हैं।

भर्ती और प्रशिक्षण

वर्षांत तक 5,000 नए रंगरूटों का लक्ष्य है, जिसमें 10% महिलाओं का कोटा। CIJW स्कूल में वीआर सिमुलेशन के साथ जंगल युद्ध प्रशिक्षण शुरू होगा।

रणनीतिक विस्तार

अरुणाचल प्रदेश में नई बटालियाँ और लद्दाख में उन्नत बुनियादी ढांचा चीन की बढ़ती दुस्साहस के जवाब में तैनात किए जा रहे हैं। 2025 की लखनऊ में सेना-भारत-तिब्बत सीमा पुलिस समन्वय बैठक ने "एक सीमा, एक बल" नीति को मजबूत किया।

पोस्ट के चित्र का विश्लेषण

  • रेगिस्तानी इलाका: संभवतः दौलत बेग ओल्डी (लद्दाख), जहां गर्मियों में गश्त होती है, अनुकूलन दर्शाता है।
  • झील के पास: शायद पंगोंग त्सो, 2020 के बाद प्रशिक्षण और निगरानी क्षेत्र।
  • बर्फीला क्षेत्र: नाथू ला या डोरजिला, ऊंचाई पर दृढ़ता का प्रतीक।
  • ध्वज: तिरंगा और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का प्रतीक राष्ट्रीय गौरव और संगठन की पहचान को दर्शाता है।

राजभवन की पोस्ट केवल शुभकामना नहीं, बल्कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के 63 साल के शौर्य, बलिदान, और सेवा के इतिहास का सम्मान है। 24 अक्टूबर 2025 को स्थापना दिवस के रूप में, यह बल भारत की उत्तरी सीमाओं की रक्षा और जनता की सहायता के संकल्प का प्रतीक है। सुरेंद्र सिंह के बचाव से लेकर हरीश चंद्र के बलिदान तक, ये कहानियां पोस्ट के चित्रों के पीछे छिपे बलिदान को प्रतिबिंबित करती हैं, जो राष्ट्र को प्रेरित करती हैं।

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