Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
ऊना। प्रतिभा और मेहनत के दम पर हर विद्यार्थी अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन कई बार आर्थिक कठिनाइयां उसके सपनों के बीच सबसे बड़ी रुकावट बन जाती हैं। ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना हजारों युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को बेहद कम ब्याज दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे बिना आर्थिक चिंता के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल पैसों की कमी के कारण अपने करियर और उच्च शिक्षा के सपनों से समझौता करने के लिए मजबूर न हो।
जिला ऊना के चौकीमनियार गांव की रहने वाली अवनी शर्मा इस योजना का लाभ पाने वाली प्रेरणादायक छात्राओं में शामिल हैं। सीमित आय वाले परिवार से संबंध रखने वाली अवनी के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगी पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके। अवनी वर्तमान में बीएससी मेडिकल (एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी) की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में चार बहनें हैं और उनके पिता मनरेगा में कार्य करने के साथ-साथ दिहाड़ी मजदूरी करके पूरे परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे हालात में उच्च शिक्षा का खर्च जुटाना परिवार के लिए बेहद कठिन था। इसी दौरान उन्हें Education Loan योजना की जानकारी मिली और उन्होंने आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें चार लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिससे उनकी पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रह सकी।
अवनी की माता सुमन शर्मा बताती हैं कि पहले बच्चों की पढ़ाई का खर्च परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता थी। आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण भविष्य को लेकर हमेशा असमंजस बना रहता था, लेकिन इस योजना ने काफी राहत पहुंचाई है। उनका कहना है कि इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नई दिशा मिली है और अब वे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का सपना पूरा कर सकते हैं। इसी प्रकार हरोली विधानसभा क्षेत्र के भदसाली गांव के तनिष्क जसवाल भी इस योजना का लाभ लेकर कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें छह लाख रुपये का शिक्षा ऋण स्वीकृत हुआ, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ काफी कम हुआ और वे अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान दे पा रहे हैं।
योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को Student Loan के रूप में अधिकतम 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता केवल एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इस राशि का उपयोग ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क, भोजन, अध्ययन सामग्री, प्रयोगशाला शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों के लिए किया जा सकता है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब परिवार की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है। इससे पहले यह सीमा चार लाख रुपये थी। नई व्यवस्था के बाद मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिक विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे।
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। आवेदन करने वाले विद्यार्थी की आयु 28 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा पिछली कक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। योजना के अंतर्गत मेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, फार्मेसी, प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा, स्नातकोत्तर तथा शोध स्तर तक के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए Higher Education के उद्देश्य से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह सरल और पारदर्शी रखी गई है। इच्छुक विद्यार्थी संबंधित कार्यालय या आधिकारिक माध्यम से आवेदन पत्र प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा कर सकते हैं।
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जिला प्रशासन का कहना है कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी विद्यार्थी की प्रतिभा उसकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यदि योग्य विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहयोग मिले तो वे अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ समाज और प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सरकार की यह पहल न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि हजारों युवाओं के भीतर आत्मविश्वास भी पैदा कर रही है। Himachal Pradesh में शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह योजना कई परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
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