हिमाचल में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग
हिमाचल में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग

Post by : Himachal Bureau

Oct. 5, 2026 12:53 p.m. 142

शिमला। हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने प्रदेश में लोगों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम से जुड़ी शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग उठाई है। परिषद का कहना है कि बदलते डिजिटल दौर में बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी देना जरूरी हो गया है। परिषद के अध्यक्ष जोगेन्द्र कंवर और उपाध्यक्ष रणजीत सिंह धीमान ने संयुक्त बयान में कहा कि उपभोक्ता अधिकारों को लेकर स्कूली शिक्षा में पर्याप्त जानकारी शामिल किए जाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि इस दिशा में अभी तक अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।

ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल लेनदेन से बढ़ी जागरूकता की जरूरत

परिषद के अनुसार आज ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान और असंतोषजनक सेवाओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। परिषद का मानना है कि उपभोक्ता अधिकार यदि बच्चों को स्कूल स्तर से ही समझाए जाएं, तो वे आगे चलकर अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकते हैं।

मिलावट और भ्रामक विज्ञापनों से बचाव पर जोर

परिषद ने कहा कि आज उपभोक्ताओं के सामने केवल पारंपरिक बाजार से जुड़ी समस्याएं ही नहीं हैं, बल्कि मिलावट, गलत या भ्रामक प्रचार और डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। ऐसे में उपभोक्ता जागरूकता को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने से विद्यार्थियों में सही जानकारी हासिल करने, खरीदारी से पहले सावधानी बरतने और शिकायत के अधिकारों को समझने की क्षमता विकसित हो सकती है।

ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ

परिषद का कहना है कि साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े मामलों के बढ़ते प्रभाव के बीच उपभोक्ता शिक्षा को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। स्कूलों के माध्यम से यह जानकारी गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी आसानी से पहुंचाई जा सकती है। इससे नई पीढ़ी उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े कानूनों, अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकेगी।

सरकार के समक्ष मांग रखने की तैयारी

परिषद ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष इस मांग पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। परिषद के अनुसार जल्द ही उसका प्रतिनिधिमंडल सरकार से मुलाकात कर इस विषय में अपनी मांग, सुझाव और संभावित पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करेगा। परिषद का कहना है कि उपभोक्ता शिक्षा को स्कूली स्तर पर बढ़ावा देने से भविष्य में अधिक जागरूक उपभोक्ता तैयार किए जा सकते हैं और समाज में खरीदारी, सेवाओं तथा डिजिटल लेनदेन को लेकर जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सकती है।

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को स्कूलों में पढ़ाने की मांग क्यों की गई है?

परिषद का मानना है कि विद्यार्थियों को कम उम्र से ही उपभोक्ता अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी मिलनी चाहिए।

डिजिटल दौर में उपभोक्ता जागरूकता क्यों जरूरी है?

ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल लेनदेन बढ़ने के कारण लोगों के लिए सावधानी और अपने अधिकारों की जानकारी जरूरी हो गई है।

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