हिमाचल शीतकालीन सत्र: सीएम सुक्खू और जयराम ठाकुर में तीखी नोकझोंक
हिमाचल शीतकालीन सत्र: सीएम सुक्खू और जयराम ठाकुर में तीखी नोकझोंक

Post by : Khushi Joshi

Dec. 6, 2025 1:19 p.m. 2695

धर्मशाला के तपोवन में चल रहे हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन का माहौल अचानक गर्म हो गया। सोशल मीडिया पेज से जुड़े एक प्रश्न पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच कई बार तल्ख टिप्पणियाँ हुईं और सदन में राजनीतिक तकरार देखने को मिली।

विपक्ष की ओर से पूछा गया सवाल सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद जयराम ठाकुर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार प्रश्नों के जवाब देने से बच रही है। उन्होंने दावा किया कि इसी मुद्दे पर उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से जानकारी प्राप्त की है, जबकि सरकार के पास सटीक जवाब मौजूद नहीं है। जयराम ठाकुर का कहना था कि विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि यह जनप्रतिनिधियों का अपमान भी है।

जयराम ठाकुर ने सदन में RTI से मिले दस्तावेजों का हवाला दिया और सरकार से पूछा कि सोशल मीडिया पेज के संचालन, खर्च और जिम्मेदार लोगों की जानकारी संसद में क्यों उपलब्ध नहीं करवाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई महत्वपूर्ण जानकारी छिपा रही है, इसलिए जनता के सवालों का जवाब देने से बचा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला वित्तीय प्रकृति का है, इसलिए पूरी जानकारी सत्यापन के बाद ही दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा रखे गए तथ्यों की भी जांच की जाएगी और जो भी आवश्यक बदलाव होंगे, सरकार उन पर विचार करेगी।

सीएम सुक्खू ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी सभी संबंधित विवरण और आधिकारिक जानकारी अगले विधानसभा सत्र में प्रस्तुत कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी और जहाँ जरूरत होगी, प्रक्रियाओं में संशोधन भी किया जाएगा।

सत्र के अंतिम दिन की इस तीखी बहस ने सदन की राजनीतिक गर्मी को चरम पर पहुंचा दिया। समर्थक दलों की ओर से आस-पास से शोर और टिप्पणियाँ भी सुनाई दीं, जिससे माहौल कुछ समय के लिए शोरगुल में बदल गया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश की और कार्यवाही आगे बढ़ाई।

विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आगामी महीनों में भी हिमाचल की राजनीति का अहम मुद्दा बना रह सकता है, क्योंकि सोशल मीडिया खर्च और सरकारी पारदर्शिता विपक्ष की प्रमुख चिंता के केंद्र में रहेगा। वहीं, सत्ता पक्ष का दावा है कि जवाब देने से पीछे हटने का सवाल नहीं है, बल्कि पूरा डेटा सही रूप में सदन में लाना सरकार की प्राथमिकता है।

फिलहाल इस टकराव ने सत्र के अंत में यह साफ संदेश दे दिया कि प्रदेश की राजनीति में मुकाबला आने वाले समय में और तीखा होने वाला है।

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