मंदिरों के चढ़ावे से जरूरतमंदों को मदद की तैयारी, हाई कोर्ट जाएगी सरकार
मंदिरों के चढ़ावे से जरूरतमंदों को मदद की तैयारी, हाई कोर्ट जाएगी सरकार

Post by : Himachal Bureau

Sept. 1, 2026 2:41 p.m. 112

हिमाचल प्रदेश के सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का रास्ता तलाशने के लिए प्रदेश सरकार हाई कोर्ट का रुख करेगी। विधानसभा के शून्यकाल में चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यह जानकारी दी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं और इनमें से कई प्रमुख मंदिरों में हर साल बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है। सरकार चाहती है कि नियमों और न्यायालय के निर्देशों के दायरे में रहते हुए इस राशि का कुछ हिस्सा जनकल्याण से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल किया जा सके।

मंदिरों के चढ़ावे को सामाजिक कार्यों में लगाने की तैयारी

मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में बताया कि पूर्व में मंदिरों की राशि का इस्तेमाल सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद इस राशि के इस्तेमाल पर कुछ पाबंदियां लागू हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की कानूनी जांच करवा रही है। विधि विभाग से भी इस विषय पर शुरुआती चर्चा की गई है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपना पक्ष रखेगी।

जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद चाहती है सरकार

सरकार का प्रयास है कि मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का उपयोग धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ जरूरतमंद वर्गों के हित में भी किया जा सके।

विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा और अन्य सामाजिक कल्याण कार्यों के लिए मंदिर निधि के उपयोग की संभावनाओं पर सरकार कानूनी राय ले रही है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत के समक्ष सरकार इस मुद्दे पर मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।

भोरंज में बंद बस रूट का मुद्दा भी उठा

शून्यकाल में भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने क्षेत्र में बस रूट बंद होने का मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि संबंधित रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है और जल्द इनका संचालन शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी कहा कि जिन रूटों का मामला विधायक ने उठाया है, उनके संबंध में स्थानीय प्रबंधन से बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा।

चौपाल के दुर्गम इलाकों में चलेंगी डीजल बसें

विधायक बलवीर शर्मा द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश को 300 नई इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं। इन्हें उन क्षेत्रों में भेजा जा रहा है जहां भौगोलिक परिस्थितियां इनके संचालन के अनुकूल हैं।

उन्होंने कहा कि चौपाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार वहां डीजल बसें उपलब्ध करवाएगी।

सफेदा कटान की प्रक्रिया सरल करने की मांग

विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने पांवटा साहिब, नालागढ़ और नूरपुर जैसे सफेदा उत्पादक क्षेत्रों के किसानों की समस्याओं को विधानसभा में उठाया।

उन्होंने कहा कि नई अनुमति प्रक्रिया के कारण किसानों को कई स्तरों से मंजूरी लेनी पड़ रही है। ऑनलाइन आवेदन के साथ फोटो अपलोड करने और विभिन्न शुल्कों के कारण भी परेशानी बढ़ी है।

सत्ती ने सरकार से प्रक्रिया सरल करने और फायर सीजन के दौरान भी सफेदा की फसल काटने की अनुमति देने की मांग की।

भूमिहीन परिवारों की BPL पात्रता पर मांगी स्थिति स्पष्ट

विधायक सुधीर शर्मा ने पूरी तरह भूमिहीन परिवारों की बीपीएल पात्रता का मामला उठाते हुए सरकार से नियम स्पष्ट करने की मांग की।

उन्होंने पूछा कि ऐसे परिवारों को हिमाचली होने की पुष्टि के लिए कौन से दस्तावेज देने होंगे। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने की मांग की कि पात्रता व्यवस्था का अनुचित लाभ न उठाया जाए।

रिवालसर में पुलिस थाना खोलने की मांग

विधायक इंद्र सिंह गांधी ने ऊपरी बल्ह क्षेत्र के रिवालसर में नया पुलिस थाना खोलने की मांग की।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र का दायरा बड़ा और भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं। मौजूदा पुलिस चौकी में सीमित कर्मचारियों के कारण कानून-व्यवस्था संभालने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने क्षेत्र में नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों पर भी चिंता जताई।

बिलासपुर सदर में बिजली कटौती से पानी की आपूर्ति प्रभावित

विधायक त्रिलोक जम्वाल ने बिलासपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली कटौती का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि लगातार बिजली कट लगने से पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और लोगों को पानी की आपूर्ति में परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसका असर विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई और रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को संबंधित विभाग के पास भेजने की बात कही।

मंदिरों के चढ़ावे को लेकर सरकार क्या करने जा रही है?

प्रदेश सरकार मंदिर निधि के सामाजिक उपयोग पर लागू कानूनी पाबंदियों का अध्ययन कर रही है। कानूनी प्रक्रिया के बाद सरकार हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की अनुमति मांगने की तैयारी कर रही है।

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