हिमाचल में बेरोजगारी पर सदन गरमाया, सरकार से मांगा जवाब
हिमाचल में बेरोजगारी पर सदन गरमाया, सरकार से मांगा जवाब

Post by : Himachal Bureau

Sept. 3, 2026 1:24 p.m. 308

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में रोजगार और बेरोजगारी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहा। नियम 130 के तहत लाए गए प्रस्ताव पर तीसरे दिन भी बहस जारी रही, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोंक-झोंक देखने को मिली। चर्चा की शुरुआत करते हुए विधायक बिक्रम ठाकुर ने प्रदेश में रोजगार के अवसर, सरकारी भर्तियों की रफ्तार और उद्योगों की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नियमित सरकारी नौकरियों की संख्या घट रही है और युवाओं को स्थायी रोजगार के बजाय आउटसोर्स तथा कम मानदेय वाली नौकरियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

पांच लाख नौकरियों के वादे पर सवाल

विपक्ष ने कांग्रेस के चुनावी वादों का मुद्दा भी सदन में उठाया। विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने पांच वर्षों में पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार अब तक कितने युवाओं को नियमित रोजगार देने में सफल रही है और कितनी भर्तियां स्थायी पदों पर की गई हैं। विपक्ष का आरोप है कि आउटसोर्स, मानदेय और अस्थायी आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे काम को नियमित रोजगार के समान पेश नहीं किया जाना चाहिए।

बेरोजगारी दर को लेकर भी हुई बहस

सदन में बेरोजगारी दर से जुड़े आंकड़े भी चर्चा का हिस्सा बने। विपक्ष की ओर से दावा किया गया कि प्रदेश की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इन आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने सरकार से रोजगार नीति, निजी निवेश और नई नौकरियों के सृजन को लेकर स्पष्ट रणनीति सामने रखने की मांग की।

कम मानदेय वाली नौकरियों का मुद्दा उठा

विधानसभा में विभिन्न विभागों में मानदेय आधारित नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए गए।विपक्ष ने वन मित्र, पशु मित्र, जल वाहक और बिजली मित्र जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को अपेक्षाकृत कम मानदेय पर काम दिया जा रहा है। उनका कहना था कि ऐसे रोजगार से युवाओं को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलती। सदन में यह भी सवाल उठाया गया कि सरकार नियमित पदों पर भर्ती बढ़ाने की दिशा में क्या कदम उठा रही है।

उद्योगों के माहौल पर भी सरकार घिरी

चर्चा के दौरान प्रदेश में औद्योगिक निवेश और निजी क्षेत्र में रोजगार की स्थिति का मुद्दा भी उठा। विपक्ष ने दावा किया कि यदि उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार नहीं किया गया तो युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सीमित हो सकते हैं। विधायकों ने सरकार से नई औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करने, मौजूदा उद्योगों को प्रोत्साहन देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।

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सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोंक-झोंक

रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के विधायकों के बीच कई बार तीखी बहस हुई। विपक्ष ने सरकार से चुनावी वादों का हिसाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष ने रोजगार और भर्ती से जुड़े अपने कदमों का बचाव किया। विधानसभा में जारी यह चर्चा इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में रोजगार, सरकारी भर्ती और युवाओं के भविष्य का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में प्रमुख विषय बना रह सकता है। प्रदेश के हजारों युवा सरकारी भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं और निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में सरकार की अगली भर्ती योजनाओं और रोजगार नीति पर अब सबकी नजर रहेगी।

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