Post by : Himachal Bureau
शिमला, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के सेब बागवान बीते कुछ वर्षों से लगातार बदलते मौसम, कम होते चिलिंग आवर्स, अनियमित बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इन परिस्थितियों का सीधा असर न केवल सेब की पैदावार पर पड़ा है, बल्कि गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। ऐसे समय में मिट्टी की सेहत को सुधारना किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आ रहा है।
इसी उद्देश्य के साथ अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड द्वारा हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानों के लिए एक विशेष सॉइल टेस्टिंग कैंपेन चलाया जा रहा है। इस अभियान के जरिए किसानों को यह समझाया जा रहा है कि खाद और उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की वैज्ञानिक जांच क्यों जरूरी है और इससे फसल की गुणवत्ता व पैदावार को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कंपनी का मानना है कि जब मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी फसल भी बेहतर होगी।
इस सॉइल टेस्टिंग कैंपेन की शुरुआत 5 जनवरी से सेंज क्षेत्र में हुई, जो 12 जनवरी तक चलेगी। इसके बाद यह अभियान 13 से 18 जनवरी तक रोहड़ू और 18 से 22 जनवरी तक रामपुर में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कैंपेन में 3 से 4 हजार से अधिक सेब बागवानों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अभियान के दौरान सॉइल टेस्टिंग से जुड़े विशेषज्ञ, लैब टेक्नीशियन, नौनी यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिक और प्लांट पैथोलॉजी एक्सपर्ट्स किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं। किसानों को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति, आवश्यक खाद का सही चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, उचित प्रूनिंग तकनीक और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि सेब की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जा सके।
गौरतलब है कि अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड लंबे समय से हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के साथ ज़मीनी स्तर पर जुड़कर काम कर रहा है। चाहे खरीद सीज़न के दौरान सेब की निरंतर खरीदी हो या किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देना, कंपनी का फोकस किसानों को दीर्घकालीन और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ाने पर रहा है।
इससे पहले नवंबर माह में भी कंपनी द्वारा इसी तरह का सॉइल टेस्टिंग कैंपेन आयोजित किया गया था, जिसे किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। कई किसानों ने बताया कि मिट्टी की जांच के बाद खाद के उपयोग में किए गए बदलावों से फसल की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला।
अदाणी एग्री फ्रेश का यह सॉइल टेस्टिंग कैंपेन केवल मिट्टी की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती की ओर मार्गदर्शन देने की एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में हिमाचल के सेब बागवानों को बेहतर परिणाम मिल सकें।
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