Post by : Khushi Joshi
सोलन, शिमला और बद्दी के सरकारी अस्पताल इन दिनों एक ऐसी फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट का शिकार हो गए हैं, जिसने हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों से इंटरनेट पर एक एक्स-रे रिपोर्ट की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक्स-रे मशीन के भीतर जीवित कॉकरोच दिखाई दिए। कभी इसे सोलन अस्पताल की घटना बताया जा रहा है, तो कुछ ही समय बाद तस्वीर को एडिट कर शिमला और बद्दी अस्पताल से जोड़ दिया गया, जिसके कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को लेकर भारी भ्रम फैलने लगा। वायरल पोस्ट के बाद सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल में एक्स-रे करवाने वाले मरीजों की संख्या भी सामान्य से कम हो गई, क्योंकि लोग डर और शंका में पड़ गए। स्वास्थ्य विभाग ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच की और पाया कि यह पूरा मामला एआई जनरेटेड, यानि कंप्यूटर द्वारा तैयार किया गया छेड़छाड़ वाला चित्र है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विभागीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी भ्रामक पोस्टें आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बेहद आसानी से बनाई जा रही हैं, जिससे वास्तविक और नकली सामग्री में फर्क करना आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
वायरल अफवाह में यह काल्पनिक कहानी गढ़ी गई थी कि सिंगापुर से एक पर्यटक भारत घूमने आया, उसे सोलन में सीने में तेज दर्द हुआ तो उसने सरकारी अस्पताल में एक्स-रे करवाया, रिपोर्ट में डॉक्टर ने उसके सीने में जिंदा कॉकरोच दिखाकर उसे तुरंत सिंगापुर लौट जाने की सलाह दी। कथित पोस्ट में यह भी लिखा गया कि सिंगापुर में जांच करने पर पता चला कि कॉकरोच उसके शरीर में नहीं बल्कि एक्स-रे मशीन में था। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि न तो कोई विदेशी मरीज इस तरह आया और न ही ऐसी कोई मेडिकल रिपोर्ट अस्तित्व में है। इस मनगढ़ंत कहानी को लगातार अलग-अलग ज़िलों के नाम के साथ वायरल किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग भ्रमित हो जाएँ और सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगे। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पंवार ने कहा कि इस प्रकार की अफवाहें मरीजों को डराती हैं और इलाज में अनावश्यक बाधा डालती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।
स्वास्थ्य विभाग ने साइबर सेल के साथ मिलकर वायरल पोस्ट की उत्पत्ति का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का मानना है कि यह जानबूझकर अस्पतालों की प्रतिष्ठा खराब करने का प्रयास है, क्योंकि पोस्ट में प्रदेश के तीन बड़े स्वास्थ्य केंद्रों को निशाना बनाया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी फैलाना आईटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक जितनी तेजी से दुनिया को बदल रही है, उतनी ही तेजी से इसका दुरुपयोग भी हो रहा है। लोग सनसनी की चाह में बिना तथ्य सत्यापित किए हर सामग्री आगे भेज देते हैं, जो समाज के लिए नुकसानदायक है। फिलहाल विभाग की टीम जनता को जागरूक करने और अस्पतालों की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने में जुटी हुई है, ताकि मरीज निश्चिंत होकर अपनी चिकित्सा जांच और इलाज करवा सकें। इस भ्रामक पोस्ट से साबित हो गया है कि डिजिटल युग में अफवाहें भी हाई-टेक हो चुकी हैं, इसलिए जागरूकता और सत्यापन ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
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