Post by : Himachal Bureau
धर्मशाला। कांगड़ा जिले के गगल एयरपोर्ट के प्रस्तावित विस्तार को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार के सामने बड़ा वित्तीय दबाव खड़ा हो गया है। भूमि अधिग्रहण पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च होने के अनुमान के बीच अब सरकार परियोजना के निर्माण और संचालन में निजी निवेश की भागीदारी बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है।
इसी के तहत एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि निजी निवेश के माध्यम से परियोजना की बड़ी लागत का कुछ हिस्सा साझा किया जा सके और राज्य के खजाने पर पड़ने वाला प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ कम हो।
गगल एयरपोर्ट विस्तार परियोजना में सबसे बड़ा खर्च भूमि अधिग्रहण से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जरूरी जमीन के अधिग्रहण पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
इसी वित्तीय दबाव के कारण सरकार अब ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें परियोजना के निर्माण और भविष्य के संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
गगल एयरपोर्ट विस्तार परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा प्रस्तावित रनवे का विस्तार है।
योजना के अनुसार नए रनवे को मांझी खड्ड के ऊपर से आगे बढ़ाया जाना है, जिसके लिए एक बड़े रनवे ब्रिज का निर्माण करना होगा।
प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक केवल इस रनवे ब्रिज के निर्माण पर ही करीब 500 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इस लागत का वहन राज्य सरकार को करना पड़ सकता है।
परियोजना की लागत केवल भूमि अधिग्रहण और रनवे निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी।
एयरपोर्ट विस्तार के साथ संपर्क मार्गों के निर्माण, जल निकासी व्यवस्था, बिजली, पानी और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने पर भी अतिरिक्त धनराशि खर्च होगी।
इन सभी कार्यों को शामिल करने पर परियोजना की कुल लागत काफी बढ़ सकती है।
मौजूदा प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एयरपोर्ट निर्माण से जुड़ी मुख्य जिम्मेदारी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपी जानी है।
हालांकि PPP मॉडल को अपनाए जाने की स्थिति में निर्माण, संचालन और निवेश से जुड़ी जिम्मेदारियों का नया ढांचा तय किया जा सकता है।
इसमें निजी कंपनियों की भूमिका, निवेश की अवधि और राजस्व वितरण जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।
सरकार के लिए PPP मॉडल लागू करना भी आसान प्रक्रिया नहीं होगी।
किसी भी निजी निवेशक को परियोजना में शामिल करने से पहले इसकी कुल लागत, संभावित आय, निवेश की वापसी, संचालन अवधि और राजस्व हिस्सेदारी जैसे पहलुओं का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय अध्ययन करना होगा।
इसके बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि परियोजना के लिए PPP मॉडल आर्थिक रूप से कितना व्यवहारिक रहेगा।
सरकार का प्रमुख उद्देश्य एयरपोर्ट विस्तार जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए राज्य के वित्तीय संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना है।
यदि PPP मॉडल व्यवहारिक पाया जाता है, तो निजी क्षेत्र की भागीदारी से निर्माण और संचालन के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।
गगल एयरपोर्ट का विस्तार कांगड़ा और धर्मशाला क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। हालांकि इसकी अंतिम संरचना और वित्तीय मॉडल का फैसला विस्तृत अध्ययन के बाद ही होने की संभावना है।
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भूमि अधिग्रहण पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त रनवे ब्रिज और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अलग से खर्च होगा।
सरकार परियोजना में निजी निवेश लाकर राज्य के खजाने पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष वित्तीय दबाव को कम करना चाहती है।
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