Author : Kuldeep Singh Thakur Jalai, Chamba
जिला चंबा के प्रतिष्ठित शिक्षक युद्धवीर टंडन को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और नवाचारी योगदान के लिए बेंगलुरु स्थित अंतर्राष्ट्रीय आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर में आयोजित भव्य समारोह में “श्री श्री नेशनल अवार्ड फॉर एजुकेशन” से सम्मानित किया गया। इस समारोह में विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी नेता परम पूज्य श्री श्री रवि शंकर उपस्थित रहे, साथ ही कर्नाटक सरकार के माननीय लोकायुक्त न्यायाधीश ने भी इस मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
युद्धवीर टंडन को यह सम्मान उनके द्वारा जिला चंबा के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के असाधारण प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को अपनाया, बाल-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा दिया, स्थानीय संदर्भों से जुड़े शिक्षण सामग्री विकसित की और छात्रों की सहभागिता को अधिकतम किया।
गौरतलब है कि इससे पूर्व युद्धवीर टंडन को भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वे यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के शिक्षकों में से एक हैं, जो उनके समर्पण और प्रतिभा का स्पष्ट प्रमाण है।
शिक्षा के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने अब तक आधा दर्जन से अधिक कविता संग्रह लिखे और संपादित किए हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों की सामान्य ज्ञान क्षमता बढ़ाने हेतु उपयोगी पुस्तकें लिखी हैं। इनमें विशेष रूप से “बदलती तस्वीर” और “उड़ान” पुस्तकें शामिल हैं, जो क्रमशः शिक्षकों के नवाचार और छात्राओं की सफलता की कहानियों पर आधारित हैं।
हाल ही में उनके द्वारा विकसित Teaching Learning Material का चयन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ और उन्होंने नेशनल फिनाले तक अपनी जगह बनाई। यह उपलब्धि उनके सतत नवाचार, समर्पण और शैक्षणिक दृष्टि का प्रमाण है। उन्होंने प्रकृति की पाठशाला, बाल संविधान, अंडे का फंडा, वार्षिक ई-कैलेंडर निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से छात्रों के चतुर्मुखी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कक्षा कक्ष में शैक्षणिक नवाचारों के अलावा, युद्धवीर टंडन ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री का निर्माण किया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शिक्षा और देशभक्ति से जुड़े गीत भी तैयार किए हैं। अपने व्यक्तिगत शैक्षणिक विकास में उन्होंने M.Ed, UGC NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास कर उत्कृष्ट मुकाम हासिल किया। वर्तमान में वे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के दूरस्थ अध्ययन केंद्र से B.Ed की पढ़ाई और शिक्षा के क्षेत्र में शोध कार्य भी कर रहे हैं।
युद्धवीर टंडन की यह उपलब्धि न केवल जिला चंबा बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक हिंगराज चिराग और जिला मीडिया समन्वयक डॉ. कविता बिजलवान ने शिक्षक टंडन को यह पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
पुरस्कार प्राप्त करने पर युद्धवीर टंडन ने कहा कि यह सम्मान वे अपने विद्यालय के बच्चों और अपनी माता पानो देवी के जीवनभर के समर्पण को समर्पित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता को निरंतर बढ़ाना और हिमाचल प्रदेश के छात्रों को सर्वांगीण विकास की दिशा में मार्गदर्शन देना है।
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